बरेली। रुहेलखंड विश्वविद्यालय के व्यय का अनुमान आय से अधिक है। इससे विश्वविद्यालय से जुड़ा हर व्यक्ति परेशान है। सोमवार को आयोजित वित्त समिति की बैठक में भी अधिकारी चुप्पी साधे रहे। लगातार घाटे में जा रहे विश्वविद्यालय को कैसे बाहर निकाला जाए, इस पर कोई स्पष्ट राय नहीं बन सकी। मुरादाबाद मंडल के कॉलेजों के हाथ से निकलने का सीधा प्रभाव विश्वविद्यालय के बजट पर दिख रहा है।
रुविवि की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, दो वर्षों से आय घट रही है। वित्त समिति की बैठक के बाद कर्मचारियों, अधिकारियों व शिक्षकों में चर्चा है कि विश्वविद्यालय की आय बढ़ाने के लिए कोई सख्त कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। नई भर्तियां होने से रुविवि पर वित्तीय बोझ बढ़ रहा है। बीते दिनों विश्वविद्यालय ने फिजिकल एजुकेशन के एसोसिएट प्रोफेसर, केंद्रीय पुस्तकालय में एसोसिएट प्रोफेसर सहित कुल चार पदों पर भर्ती निकली है।फिजिकल एजुकेशन का विभाग ही स्थापित नहीं है, ऐसे में पद सृजित करना चर्चा का विषय बना हुआ है। बीते वर्ष खुले कृषि विभाग में 42 पदों को भरा जाना है। सेवानिवृत्त हो रहे शिक्षकों व कर्मचारियों की पेंशन व अन्य खर्च भी परेशानी का सबब बनेंगे। इसका सीधा असर छात्रों की फीस पर पड़ेगा। बैठक में रुहेलखंड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. केपी सिंह, कुलसचिव हरीशचंद्र, वित्त अधिकारी विनोद कुमार, परीक्षा नियंत्रक संजीव सिंह व अन्य शामिल रहे।
598 से घटकर रह गए रह गए 142 कॉलेज
मुरादाबाद में गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय बनने के बाद रुहेलखंड विश्वविद्यालय के आधे से अधिक कॉलेज घट गए। शाहजहांपुर में विश्वविद्यालय बनने के बाद ये कयास भी लगाए जा रहे हैं कि पीलीभीत के महाविद्यालय भी रुविवि के हिस्से से हट सकते हैं।
वर्जन
वित्त समिति की बैठक में आय-व्यय पर चर्चा हुई है। शेष जानकारी गोपनीय है। इसे सार्वजनिक रूप से उजागर नहीं किया जा सकता है। - विनोद कुमार, सचिव, वित्त समिति
बीते दो वर्षों के आय-व्यय का ब्योरा
वर्ष आय व्यय
2024-25(पुनरीक्षित) 2,24,20,47,000 2,36,55,50,000
2025-26(अनुमान) 1,97,49,67,000 2,22,03,30,000
नोट : आंकड़े रुविवि की वार्षिक पुस्तिका के अनुसार रुपये में।