डीएनए डेटा से गैंडों की हो सकेगी पहचान
दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर रमेश कुमार पांडेय ने बताया कि गैंडों का शिकार इसकी सींग के लिए होता है। अब यदि कहीं भी गैंडे की सींग बरामद होती है तो डीएनए डेटा से यह बात आसानी से पता लगाई जा सकेगी कि गैंडे का शिकार किस जंगल से हुआ है। उन्होंने बताया कि पूरे देश में सबसे पहले दुधवा के गैंडों का ही डीएनए डेटा तैयार किया गया है।
गैंडा पुनर्वासन योजना में एक गैंडा शावक मिला
दुधवा नेशनल पार्क के गैंडा पुनर्वासन योजना फेज-1 में पेट्रोलिंग के दौरान वनकर्मियों को एक नन्हा गैंडा शावक दिखाई दिया। इसकी उम्र अधिकतम दो माह है। अभी इसके लिंग की पहचान नहीं हो सकी है। दुधवा की मादा गैंडे ने करीब दो माह पहले इस बच्चे को जन्म दिया है। पता लगाया जा रहा है कि यह किस मादा गैंडे का बच्चा है। साथ ही इसका भी डीएनए डेटा बनाया जाएगा। पिछले माह 22 फरवरी को भीमसेन नामक युवा नर गैंडे की प्रणय संघर्ष में मौत की दुखद घटना के बाद दुधवा प्रशासन को यह पहली खुशखबरी मिली है।
दो और गैंडों को मंगाने की चल रही प्रक्रिया
दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर रमेश कुमार पांडेय ने बताया कि दुधवा के गैंडा परिवार को इन्ब्रीडिंग की समस्या से उबारने लिए प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) के स्तर से दुधवा के लिए दो और नर गैंडे मंगाने के लिए आसाम सरकार से पत्र व्यवहार किया जा रहा है। उम्मीद है कि जल्दी ही दो और नर गैंडे दुधवा नेशनल पार्क के गैंडा परिवार में शामिल होंगे।
भारतीय वन्यजीव संस्थान ने दुधवा टाइगर रिजर्व के गैंडों का डीएनए डेटा तैयार कर लिया हैं। डीएनए डेटा के अनुसार दुधवा में इस समय कुल 38 गैंडे हैं। डीएनए डेटा के जरिए गैंडों के संरक्षण में मदद मिलेगी।
- रमेश कुमार पांडेय, फील्ड डायरेक्टर, दुधवा टाइगर रिजर्व