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एक्सक्लूसिव : दुधवा के गैंडों का तैयार हुआ डीएनए डेटा

Fri, 15 Mar 2019 12:05 AM IST
राजेश सैनी अशोक निगम, लखीमपुर खीरी
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गैंडा
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भारतीय वन्यजीव संस्थान ने दुधवा टाइगर रिजर्व के गैंडों का डीएनए डेटा तैयार किया है। राइनो डीएनए इंडेक्सिंग सिस्टम (रोडिस) के तहत किए गए अध्ययन के दौरान लिए गए डंग (गोबर) सैंपल की वैज्ञानिक जांच और डीएनए टेस्ट में दुधवा टाइगर रिजर्व में कुल 38 गैंडे होने की पुष्टि हुई है। भारतीय वन्यजीव संस्थान ने गैंडों के गोबर के नमूने पिछले साल एकत्र किए थे। इस अध्ययन की रिपोर्ट माह जनवरी में जारी हुई है। डीएनए डेटा से गैंडों की पहचान हो सकेगी।

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भारतीय वन्यजीव संस्थान ने राइनो डीएनए इंडेक्सिंग सिस्टम के तहत दुधवा टाइगर रिजर्व के गैंडों पर वैज्ञानिक अध्ययन किया। इसके तहत यहां से गैंडों के गोबर के कुल 89 डंग सैंपल लिए गए। इन नमूनों को भारतीय वन्यजीव संस्थान की प्रयोगशाला में विश्लेषण किया गया। इसमें 72 नमूनों से अच्छी श्रेणी के डेटा प्राप्त हुए हैं। इन सभी नमूनों से डीएनए डेटा तैयार किया गया। जिससे पता चला कि दुधवा में गैंडों की कुल संख्या 38 है। इस तरह दुधवा टाइगर रिजर्व के सभी 38 गैंडों का डीएनए डेटा तैयार हो गया है।

दुधवा में 1984 में शुरू हुई थी गैंडा पुनर्वासन योजना
तराई के जंगलों से लुप्त हुए एक सींग वाले गैंडों को उनके पूर्वजों की धरती पर पुनर्वासित करने के लिए वर्ष 1984 में दुधवा नेशनल पार्क में आसाम से पांच गैंडे लाकर गैंडा पुनर्वासन योजना शुरू की गई थी। अब इनकी संख्या बढ़ कर 38 हो गई है। अप्रैल 2018 में गैंडा पुनर्वासन योजना फेज-2 भी दुधवा के बेलरायां रेंज में शुरू कर दी गई है। इसमें एक नर गैंडा नेपोलियन और तीन मादा गैंडों शमा, सुभद्रा और श्रीदेवी को रखा गया है।

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डीएनए डेटा से गैंडों की हो सकेगी पहचान 
दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर रमेश कुमार पांडेय ने बताया कि गैंडों का शिकार इसकी सींग के लिए होता है। अब यदि कहीं भी गैंडे की सींग बरामद होती है तो डीएनए डेटा से यह बात आसानी से पता लगाई जा सकेगी कि गैंडे का शिकार किस जंगल से हुआ है। उन्होंने बताया कि पूरे देश में सबसे पहले दुधवा के गैंडों का ही डीएनए डेटा तैयार किया गया है।

गैंडा पुनर्वासन योजना में एक गैंडा शावक मिला
दुधवा नेशनल पार्क के गैंडा पुनर्वासन योजना फेज-1 में पेट्रोलिंग के दौरान वनकर्मियों को एक नन्हा गैंडा शावक दिखाई दिया। इसकी उम्र अधिकतम दो माह है। अभी इसके लिंग की पहचान नहीं हो सकी है। दुधवा की मादा गैंडे ने करीब दो माह पहले इस बच्चे को जन्म दिया है। पता लगाया जा रहा है कि यह किस मादा गैंडे का बच्चा है। साथ ही इसका भी डीएनए डेटा बनाया जाएगा। पिछले माह 22 फरवरी को भीमसेन नामक युवा नर गैंडे की प्रणय संघर्ष में मौत की दुखद घटना के बाद दुधवा प्रशासन को यह पहली खुशखबरी मिली है।

दो और गैंडों को मंगाने की चल रही प्रक्रिया
दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर रमेश कुमार पांडेय ने बताया कि दुधवा के गैंडा परिवार को इन्ब्रीडिंग की समस्या से उबारने लिए प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) के स्तर से दुधवा के लिए दो और नर गैंडे मंगाने के लिए आसाम सरकार से पत्र व्यवहार किया जा रहा है। उम्मीद है कि जल्दी ही दो और नर गैंडे दुधवा नेशनल पार्क के गैंडा परिवार में शामिल होंगे। 

भारतीय वन्यजीव संस्थान ने दुधवा टाइगर रिजर्व के  गैंडों का डीएनए डेटा तैयार कर लिया हैं। डीएनए डेटा के अनुसार दुधवा में इस समय कुल 38 गैंडे हैं। डीएनए डेटा के जरिए गैंडों के संरक्षण में मदद मिलेगी।
- रमेश कुमार पांडेय, फील्ड डायरेक्टर, दुधवा टाइगर रिजर्व
 
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