बरेली। अव्यवस्थित जीवनशैली, खानपान की बदलती आदतों और शारीरिक गतिविधि में कमी से लोग हाइपरटेंशन की चपेट में आ रहे हैं। जिला अस्पताल स्थित नॉन कम्युनिकेबल डिजीज (एनीसीडी) क्लीनिक में प्रतिवर्ष 25 हजार लोगों की जांच में चार हजार पीड़ित मिल रहे हैं। विशेषज्ञों ने समय पर जांच और इलाज न होने पर हालत गंभीर होने की आशंका जताई है।
क्लीनिक प्रभारी डॉ. मयंक के मुताबिक, पहले यह बीमारी 50 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को होती थी, लेकिन अब 30-40 वर्ष आयुवर्ग के लोग भी चपेट में आ रहे हैं। काफी समय तक तनाव, जंक फूड के सेवन, नमक और तेल की अधिक मात्रा, धूम्रपान और शराब की लत इसके प्रमुख कारण बन रहे हैं।
हाइपरटेंशन का इलाज लंबे समय तक चलता है। दवा शुरू होने के बाद खुद को ठीक महसूस कर कई मरीज दवा बंद कर देते हैं, जिससे खतरा बढ़ जाता है। मरीजों को डॉक्टर की सलाह के अनुसार नियमित जांच कराने के साथ ही दवाएं लेनी चाहिए। समय से इलाज न होने पर हार्ट अटैक, ब्रेन स्ट्रोक, किडनी फेलियर, आंखों की रोशनी प्रभावित होने की आशंका रहती है।