सिरौली। 'एक नदी एक झील योजना' के तहत अरिल नदी को पुनर्जीवित करने का कार्य अभी तक शुरू नहीं हो सका है। नतीजतन, इसका कार्य अब कागजों तक सिमटकर रह गया है। इससे नदी की जमीन पर कब्जे हो गए हैं। वहीं, दूसरी ओर संभल, रामपुर जिलों में इस नदी पर हो रहे कार्यों में तेजी आ गई है। लेकिन, सिरौली से अभी तक यह कार्य शुरू नहीं हो सका है। इससे सिरौली पिछड़ रहा है।
लोगों ने बताया कि अरिल नदी संभल से रामपुर जिले में होकर सिरौली आती है। यहां गांव नबाबपुरा समेत करीब 36 गांवों से होते हुए गुजरती है, जो कि चौबारी जाकर रामगंगा नदी में मिलती है। इस नदी से हजारों हेक्टेयर भूमि की सिंचाई हो सकती है। लेकिन, जनप्रतिनिधियों की उदासीनता के चलते इसका आज तक उद्धार नहीं हो पाया। पिछली योगी सरकार में आंवला विधायक धर्मपाल सिंह सिंचाई विभाग के कैबिनेट मंत्री थे। तब उन्होंने नदी के उद्धार का संकल्प लिया। प्रशासन ने कब्जे हटाने के लिए पैमाइश शुरू की। काम आगे बढ़ता तब तक मंत्री का पद ही चला गया। उसके बाद से यह कार्य अटक गया।
अब इस वर्ष सीएम ने आदेश दिया था कि प्रदेश की विलुप्त नदियों और झीलों को पुनर्जीवित किया जाए। इस अरिल नदी पर संभल, रामपुर जिलों में अतिक्रमण हटाने और खुदाई का कार्य काफी दिनों पहली तेजी से शुरू हो गए। लेकिन, बरेली की सीमा में यह कार्य शुरू नहीं हो सका।
दो माह पूर्व लिलौर झील के निरीक्षण को आए डीएम अविनाश कुमार से नदी के पुनर्जीवित होने के बारे में बात की गई तो उन्होंने बताया कि लिलौर झील के सौंदर्यीकरण के बाद अरिल नदी के पुनर्जीवित कराने का काम कराएंगे। संवाद
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अगर वहां पर कब्जा है तो अतिक्रमण हटवाया जाएगा। अरिल नदी काे पुनर्जीवित किया जाएगा।
बृजेश कुमार, तहसीलदार, आंवला