कार्रवाई के बजाय नोटिस देकर खानापूरी करता रहा नगर निगम, सदन की बैठक में पार्षद बार-बार उठाते रहे मुद्दा
बरेली। नगर निगम क्षेत्र में स्कूल और तालाब की जमीन पर कब्जे होते रहे। अधिकारी कार्रवाई के नाम पर नोटिस देकर खानापूरी करते रहे। नतीजा, डेलापीर और महेशपुर ठाकुरान में तालाबों की हस्ती सिमट कर रह गई। दो तालाबों की दो हजार वर्गमीटर जमीन पर कब्जे की पुष्टि तो नगर निगम कर चुका है, लेकिन तमाम अतिक्रमण अभी चिह्नित नहीं हुए हैं। शाहबाद में स्कूल की जमीन पर 27 घरों का पूरा मोहल्ला बस गया।
अमर उजाला की पड़ताल में यह हकीकत सामने आई। शहर से सटे 48 गांवों को जब नगर निगम की सीमा में शामिल किया गया तो तालाबों में अचानक कब्जे की बाढ़ आ गई। किस तालाब के कितने हिस्से पर कब्जा हुआ है, निगम के पास न तो इसका रिकॉर्ड है, न ही इनको चिह्नित करने के लिए कोई प्रभावी सिस्टम है। पार्षद बार-बार सदन में अतिक्रमण का मुद्दा उठाते रहे, पर अफसरों की नींद नहीं टूटी। अब उच्च न्यायालय के आदेश के बाद कब्जे हटने की उम्मीद जगी है।
डेलापीर में तालाब की जमीन पर नौ मकान बने हैं। मौके पर मिले लोगों ने वर्षों से वहां निवास करने का दावा किया। कोहाड़ापीर के निकट शाहबाद में प्राइमरी स्कूल की जमीन पर एक-एक करके 27 मकान बने। 1540 वर्गमीटर जमीन पर कब्जा हो गया। महेशपुर ठाकुरान में तालाब की जमीन पर चार मकान बने। 500 वर्गमीटर पर अवैध कब्जा है। वार्ड 10 बड़ी बिहार में नगर निगम की जमीन पर मकान और धर्मस्थल हैं। वार्ड 19 कंंजादासपुर के आलोकनगर में अवैध निर्माण होते रहे। ब्यूरो
यहां भी हैं अवैध कब्जे
उदयपुर खास, हरूनगला, जगतपुर लाल बेगम, पीर बहोड़ा, परतापुर जीवन सहाय, परतापुर चौधरी, बाकरगंज, सैदपुर हॉकिंस, शिकारपुर चौधरी, पवन विहार समेत कई वार्डों में सार्वजनिक संपत्ति पर अवैध कब्जे सामने आए हैं।
पार्षदों ने खोली पोल
नगर आयुक्त निवास के निकट के क्षेत्र में अवैध तरीके से सरकारी जमीन पर लोगों ने रैंप बनाए हैं। मेरे वार्ड सिकलापुर में नाले पर पक्का निर्माण किया गया है। - जय प्रकाश, पार्षद
अवैध कब्जे हटाने के नाम पर अब तक सिर्फ खानापूरी की गई। मैं चाहता हूं कि कब्जे हटें और सरकारी जमीन का जनहित में उपयोग किया जाए। - नरेंद्र कुमार, उपसभापति
फाइक एन्क्लेव हो या शहर के अन्य हिस्से, सभी जगह अवैध कब्जे हैं। रास्ते संकरे हो गए हैं। अगर अब भी नहीं सुनते हैं तो नगर निगम की बैठक में मामले गूंजेंगे। - छंगामल, पार्षद
स्वालेनगर में वाल्मीकि बस्ती के पीछे और पानी की टंकी के पास सरकारी जमीन पर मकान बन गए। अगर निगरानी होती तो निगम की भूमि पर कब्जे नहीं होते। - रंजीत वाल्मीकि, पार्षद
निगम हटाएगा कब्जा, खर्च भी वसूलेगा
नगर आयुक्त संजीव कुमार मौर्य ने बताया कि तालाब और अन्य सार्वजनिक जमीनों को चिह्नित कर मौके की स्थिति दिखवा रहे हैं। सभी जमीनों पर नगर निगम की संपत्ति का बोर्ड लगेगा। अगर कहीं अवैध कब्जे हैं तो उन्हें चिह्नित कर हटवाने के लिए नगर निगम कानूनी प्रक्रिया को अपना रहा है। नगर निगम के संपत्ति विभाग ने नौ अक्तूबर को कब्जेदारों को नोटिस तामील कराया है। जिन लोगों ने नोटिस नहीं लिए, उनके मकानों की दीवारों पर नोटिस चस्पा किए गए हैं। नोटिस में 15 दिन का मौका दिया गया है। अगर इस अवधि में वे अपना निर्माण नहीं हटाते हैं तो उसे ध्वस्त कराया जाएगा। इसका खर्च भी उन्हीं से वसूला जाएगा। रिपोर्ट भी दर्ज कराई जाएगी।
त्योहार बाद हो सकती है कार्रवाई
नगर निगम के नोटिस में दी गई समयसीमा 24 अक्तूबर को खत्म हो रही है। 25 अक्तूबर यानी त्योहारों के बाद कार्रवाई होने की उम्मीद है। इसको लेकर कब्जेदार चिंतित हैं और बचाव का रास्ता तलाश रहे हैं। उनका कहना है कि वे उस जमाने से रह रहे हैं, जब लोगों के पास जमीन के कागजात नहीं होते थे। उन्हें इस जमीन पर किसी और ने रुपये लेकर बसाया है, लेकिन कोई कागज नहीं दिया। निर्माण में जमा पूंजी खत्म हो गई। अब ध्वस्तीकरण का डर सता रहा है।