कर्मचारियों ने जताई खुशी
रबर फैक्टरी पर अलकेमिस्ट का दावा खारिज होने पर कर्मचारियों ने खुशी जताई है। फैक्टरी जिस समय बंद हुई थी, 1,432 कर्मचारी कार्यरत थे। इनके वेतन और फंड के 600 करोड़ रुपये फैक्टरी पर बकाया है। बीते 24 वर्षों में इनमें से 600 लोगों की मौत हो चुकी है।
रामपुर गार्डन स्थित जनऔषधि केंद्र में बृहस्पतिवार को बैठक कर कर्मचारियों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाई। बॉम्बे हाईकोर्ट में मजबूत पैरवी के लिए शासन-प्रशासन का आभार जताया।
सिंथेटिक एंड केमिकल कर्मचारी यूनियन के महासचिव अशोक मिश्रा ने कहा कि 24 साल बाद कर्मचारियों के बकाया भुगतान का रास्ता साफ हुआ है। इसके लिए बॉम्बे हाईकोर्ट की ओर से नियुक्त ऑफिशियल लिक्विडेटर को सभी कर्मचारियों के दस्तावेज उपलब्ध करा दिए गए हैं।
16 जुलाई को लिक्विडेटर की ओर से कर्मचारियों के भुगतान को स्वीकृति भी प्रदान कर दी गई थी। मालिकाना हक जिसे भी मिलेगा, वह कर्मचारियों का भुगतान करेगा। इस दौरान संगठन के आरसी शर्मा, प्रमोद कुमार, एसएन चौबे, शिवकांत, घनश्याम, एससी निगम, मौजूद रहे।
एम्स के लिए करूंगा पैरवी : मंत्री
वनमंत्री डॉ. अरुण कुमार ने इसे बरेली के लिए उपलब्धि बताते हुए सरकार और अधिकारियों के प्रयास को सराहा। कहा कि इस जमीन का उपयोग इंडस्टि्रयल हब बनाने के लिए किया जाना चाहिए। इस जमीन पर एम्स बनाने के लिए शासन को पत्र लिखूंगा। इसके लिए खुद मुख्यमंत्री से मिलकर सिफारिश करूंगा।
बीएसएफ कैंप, हाईवे के लिए दी जा चुकी है भूमि
मैसर्स सिंथेटिक्स एंड केमिकल्स प्राइवेट लिमिटेड (रबर फैक्टरी) को वर्ष 1960 में 1380.23 एकड़ भूमि राज्य सरकार की ओर से उपलब्ध कराई गई थी। फैक्टरी बंद होने के बाद वर्तमान में 1256.65 एकड़ भूमि अवशेष है।
वर्ष 1982 में बीएसएफ कैंप स्थापित करने के लिए राज्य सरकार को 11,300.08 रुपये का भुगतान कर 100 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया गया था। राष्ट्रीय राजमार्ग-24 के चौड़ीकरण के लिए भी वर्ष 2008-09 में 9.3746 हेक्टेयर भूमि अर्जित की गई थी। प्रतिकर के रूप में मिले 4.22 करोड़ रुपये परियोजना निदेशक एवं विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी के संयुक्त खाते में जमा हैं।