बहेड़ी। बंद पड़ी कताई मिल की हाईटेंशन लाइन पर अवैध तौर पर विभाग का ट्रांसफार्मर लगाकर करोड़ों की बिजली चोरी कराने के मामले में अब एक्सईएन और एसडीओ भी शक के घेरे में आ गए हैं। शुक्रवार को इस अवैध पावर हाउस को पकड़े जाने के बावजूद यह मामला उच्चाधिकारियों से छिपा लिया गया। नियमों के मुताबिक यह जानकारी पोर्टल पर भी अपलोड नहीं की गई। मामले को हल्का करने के लिए लोड भी काफी कम दिखाने को एक्सईएन और एसडीओ के खिलाफ इस गोरखधंधे में शामिल होने का स्पष्ट प्रमाण माना जा रहा है। एसई ने दोनों की भूमिका की जांच का आदेश दिया है।
कताई मिल करीब 30 साल से बंद पड़ी है। बताया जा रहा है कि दो सालों से यहां हाईटेंशन लाइन पर अवैध रूप से विभागीय ट्रांसफार्मर लगाकर हर महीने लाखों रुपये की बिजली चोरी कराई जा रही थी। शुक्रवार को बिजली विभाग के अभियान के तहत मारे गए छापे में यह अवैध पावर हाउस पकड़े जाने के साथ करोड़ों की बिजली चोरी के इस मामले में विभागीय अफसरों की सांठगांठ का भी खुलासा हो गया। अफसरों पर इस शक की पुष्टि तब हुई जब बिजली चोरी के मामले पोर्टल पर अपलोड करने के कड़े नियम की भी अनदेखी कर दी गई। पोर्टल के ही जरिये बिजली चोरी के मामलों की जानकारी सीधे मुख्यालय तक पहुंचती है। यही नहीं जोन के उच्चाधिकारियों को भी इस मामले की कोई जानकारी नहीं दी गई।
शनिवार को अमर उजाला में खबर छपने के बाद जोनल अफसरों की जानकारी में मामला आया तो अधीक्षण अभियंता ग्रामीण एसटी जलील ने छानबीन शुरू की। एक्सईएन बहेड़ी अशोक कुमार से उन्होंने रिपोर्ट मांगी। रिपोर्ट आई तो उसमें सिर्फ दस किलोवाट की चोरी दिखाई गई थी जिस पर एसई ग्रामीण हैरत में पकड़ गए। उन्होंने एक्सईएन से पूछा कि 25 केवीए के ट्रांसफार्मर और 20 एमएम की केबिल से क्या सिर्फ दस किलोवाट बिजली की चोरी होगी, इस पर एक्सईएन जवाब नहीं दे पाए। एसई ने बताया कि वे अब खुद मौके पर निरीक्षण करेंगे। एक्सईएन और एसडीओ की भी भूमिका की जांच होगी। एसडीओ पर कई आरोप पहले से हैं। फिलहाल लोड कम दिखाकर सिर्फ 4.60 लाख रुपये का असेसमेंट किया गया है लेकिन जांच के बाद यह बढ़ सकता है।
दो करोड़ रुपये के बकाये पर कटा था कनेक्शन
करीब दस पहले दो करोड़ रुपये का बकाया होने के बाद बिजली विभाग ने कताई मिल का कनेक्शन काटा था। नियमों के मुताबिक बकाया का भुगतान किए बगैर कोई नया कनेक्शन नहीं लग सकता। सूत्रों के मुताबिक मौके पर जो ट्रांसफार्मर लगा पाया गया, वह करीब दो साल पहले आवंटित हुआ था। मौके पर मिले तकनीकी सिस्टम में भी अफसरों की सांठगांठ की संभावना जताई जा रही है। कताई मिल में ऊपर से केबिल लगाने के बजाय उसे नीचे जमीन पर बिछाया गया ताकि वह पेड़-पौधों की आड़ में छिप जाए। बाहर तो अवैध रूप से बिजली सप्लाई दी ही जा रही थी, कताई मिल के गेस्ट हाउस में लगे एसी में भी बिजली खप रही थी। बताया जा रहा है कि इस गेस्ट हाउस में आए दिन विभागीय अफसर भी जश्न मनाने पहुंचते हैं।
बंद कताई मिल में अवैध ट्रांसफार्मर से सप्लाई का पूरा सिस्टम गंभीर मामला है। इसकी जानकारी एक्सईएन और एसडीओ ने नहीं दी न पोर्टल पर डाली। दोनों अफसरों की भूमिका की जांच होगी। ट्रांसफार्मर और सिस्टम तैयार कराने वाले अफसरों को चिह्नित कर कार्रवाई होगी। असेसमेंट भी नए सिरे से जांच के बाद दोबारा होगा। - एसटी जलील, एसई ग्रामीण