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वृद्धाश्रम में रह रहे बुजुर्ग भी कोरोना संक्रमण से बचने को बरत रहे सावधानी

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बरेली की सड़कों पर फैला सन्नाटा। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
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कर्मचारियों के न आने से सफाई, खाना बनाने जैसे रोजमर्रा के काम खुद कर रहे

बरेली। यह तो पहले से ही कहा जा रहा है कि बुजुर्ग कोरोना वायरस का आसान शिकार हो सकते हैं, अब स्वास्थ्य मंत्रालय और अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ने भी वरिष्ठ नागरिकों का खास ख्याल रखने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए गाइडलाइन भी जारी कर दी है। बुजुर्ग भी कोरोना से बचने को हरसंभव जरूरी कदम उठा रहे हैं। वृद्ध आश्रमों में रह रहे बुजुर्गों ने संक्रमण से बचने के लिए बाहर निकलना बंद कर दिया है। साफ-सफाई और खान-पान की व्यवस्था पर भी खास ध्यान दे रहे हैं। हालांकि लॉकडाउन की वजह से आमतौर पर उपलब्ध होने वाली कुछ सुविधाएं बुजुर्गों को नहीं मिल पा रही हैं।
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आलमगीरीगंज घी मंडी स्थित शांति कुटीर धर्मशाला में चलने वाले कांशीराम वृद्ध आश्रम में 17 बुजुर्ग रहते हैं। इनमें नौ महिलाएं हैं। यहां रह रहे 72 वर्षीय रिटायर्ड फूड कमिश्नर अजय सक्सेना करीब पांच साल पहले पारिवारिक विवाद के चलते यहां आ गए थे। उन्होंने बताया कि महामारी के इस दौर में भी परिवार ने उनसे संपर्क करने की कोशिश नहीं की है। आश्रम में काम करने वाले सफाई कर्मचारी समेत तीन लोग लॉकडाउन की वजह नहीं आ रहे हैं। हालांकि राशन और अन्य सामान की समस्या नहीं हैं। उत्तराखंड के रहने वाले 62 वर्षीय शेखर शर्मा ने बताया कि हरी सब्जियां नहीं मिल पा रही हैं। संक्रमण से बचने के लिए बाहर के दरवाजे पर ताला लगा दिया गया है। इसके चलते सुबह शाम टहलना बंद हो गया है।
बुजुर्गों का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील पर नियमों का पूरी तरह पालन किया जा रहा है। पूरे आश्रम में सफाई व्यवस्था और खान पान का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। वृद्ध अशोक कुमार अग्रवाल, विद्या देवी गुप्ता, शारदा देवी आदि ने बताया कि कर्मचारियों के न आने से खाना बनाने के साथ ही साफ-सफाई भी खुद ही मिलजुल कर करनी पड़ रही है। बाहर से आने वाले राशन के सामान को साफ सफाई का ध्यान रखकर ही इस्तेमाल किया जाता है। ग्लब्स और मास्क का भी उपयोग होता है। हालांकि इस बीच यहां कोई बीमार नहीं हुआ है, लेकिन फिर भी पर्याप्त दवाएं उपलब्ध हैं। अन्य आश्रमों में भी लॉकडाउन के नियमों का पूरी तरह पालन किया जा रहा है।

एक महीने से जिला अस्पताल में भर्ती बुजुर्ग की नहीं हो पा रही देखभाल

घरों में तो लोग वरिष्ठ नागरिकों का ठीक से ध्यान रख रहे हैं, लेकिन अस्पतालों में भर्ती कुछ बुजुर्गों की देखभाल ठीक से नहीं हो पा रही है। लाल फाटक स्थित सरकारी वृद्ध आश्रम में रहने वाले बुजुर्ग सुभाष कुमार करीब एक महीने से जिला अस्पताल में भर्ती हैं। बाथरूम में फिसलकर गिरने पर 12 मार्च को उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। लॉकडाउन के चलते आश्रम के लोग उन्हें देखने नहीं आ पा रहे हैं। बुुजुर्ग ने अस्पताल प्रबंधन और डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाया। कहा, उनका ठीक से इलाज नहीं हो रहा है। अस्पताल में उनके लिए मास्क और अन्य सुरक्षा उपकरणों का भी इंतजाम नहीं है। जिला अस्पताल में इमर्जेंसी के मेल वार्ड में भर्ती तीन बुजुर्गों के पास भी मास्क नहीं था। शुक्रवार सुबह ही आलमपुर जाफराबाद के 61 वर्षीय केदार सिंह को सांस संबंधी तकलीफ होने पर भर्ती किया गया था।
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