25 मई को किसान एक्सप्रेस से कमलेश रानी समेत 15 महिलाओं का समूह अयोध्या में रामलला के दर्शन करने के लिए रवाना हुआ था। इनमें तीन लड़कियां भी शामिल थीं। लौटते समय बेगमपुरा एक्सप्रेस के स्लीपर कोच में वह सवार हुईं थीं। ट्रेन चलने के बाद गर्मी के चलते उन्हें घबराहट होने पर बेटे राजेश सोनी को सूचना दी गई। उसने तुरंत ही इमरजेंसी नंबर पर कॉल कर चिकित्सीय मदद मांगी, लेकिन कहीं इलाज नहीं मिला। उपचार नहीं मिलने के चलते कमलेश रानी अचेत हो गईं।
कंट्रोल रूम से सूचना आने के बाद गुरुवार रात करीब साढ़े नौ बजे ट्रेन आने पर आरपीएफ पहुंची। रेलवे के डॉक्टर ने परीक्षण करने के बाद जीआरपी को मेमो भेजा। उन्हें एंबुलेंस से राजकीय मेडिकल कॉलेज भेजा। जहां डाक्टर ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। शुक्रवार को जीआरपी ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम कराया। मृतका के बेटे राजेश सोनी ने बताया कि रेलवे से समय से उपचार मिल जाता तो जान बचाई जा सकती थी। इंस्पेक्टर जीआरपी रेहान अहमद ने बताया कि डॉक्टर का मेमो आने के बाद महिला को अस्पताल भेजा गया था।
लखनऊ से पहले हुई मौत
आरपीएफ इंस्पेक्टर अजय राय ने बताया कि महिला की मौत लखनऊ से पहले हो गई थी। लखनऊ में शव उतारने से परिजनों ने मना कर दिया था। इसके बाद शव यहां उतारा गया। वहीं दूसरी ओर ट्रेन में शव के बीच लखनऊ से शाहजहांपुर तक करीब 180 किलोमीटर यात्रियों ने सफर किया।