बरेली। एफएसडीए ने जिस तरह नकली रिफाइंड ऑयल घर-घर पहुंचवाकर होली निपटा दी, ठीक वैसे ही अब बकरीद और रक्षाबंधन को भी निपटाया जा रहा है। मुख्यालय से बकरीद से पहले अभियान शुरू करने का आदेश आने के बावजूद शहर में एफएसडीए की टीम बकरीद के दूसरे दिन नमूने भरने बाजार में निकली। कुल मिलाकर सात नमूने भरे मगर इनमें सेवई का सिर्फ एक ही था।
बकरीद के लिए शहर में करीब दस दिन पहले से खरीददारी शुरू हो गई थी। शहर में सेवई के सैकड़ों काउंटर लगाए गए थे लेकिन मुख्यालय का आदेश नजरंदाज कर जिला अभिहित अधिकारी कार्यालय ने सेवई का एक भी सैंपल नहीं भरा। बकरीद के अगले दिन टीम बाजार में निकली मगर बसंत विहार में नूरी किराना स्टोर से सेवईं का सिर्फ एक सैंपल भरकर छुट्टी कर दी। इसके अलावा कैमुआ में राधेश्याम स्वीट्स से पनीर और छेना, गांधीनगर में आदर्श स्वीट्स से बरफी, बदायूं रोड पर गुप्ता स्वीट्स से पनीर और रहपुरा चौधरी की बाबा स्वीट्स से नारियल लौज का नमूना भरा गया।
सेवई: एक करोड़ का कारोबार, नमूना सिर्फ एक
बाजार के सूत्रों के मुताबिक इस बार बकरीद पर सेवई का एक करोड़ रुपये से ज्यादा का कारोबार जिले में हुआ है। कारोबारियों के मुताबिक बाजार में सेवई की औसत कीमत करीब 50 रुपये किलो रही जिसकी वजह से इसका अच्छा कारोबार हुआ। हालांकि बकरीद निपटने तक एफएसडीए चुपचाप बैठा रहा। बकरीद के अगले एक सैंपल भरकर अभियान चलाने की खानापूरी कर ली।
देसी घी का लड्डू और पीला घेवर चर्चा में
बकरीद के बाद अब रक्षाबंधन का बाजार जोर पकड़ रहा है। रक्षाबंधन के मौके पर इस बार शहर के कुछ प्रतिष्ठानों पर उपलब्ध पीले रंग का घेवर खास चर्चा में है। कारोबारियों का दावा है कि देसी घी से तैयार पीला घेवर मलाईयुक्त होता है जिसे असली केसर से बनाया जाता है। एफएसडीए अफसर दावा करते हैं कि 440 रुपये किलो के रेट पर बिक रहा पीला घेवर केसरयुक्त नहीं हो सकता, इस कीमत पर घेवर को पीला रंग मिलाकर ही बेचा जा सकता है। यही स्थिति देसी घी से तैयार लड्डू की है। पिछले दिनों इसके नमूने लैब में फेल हो गए थे। मगर इस बार एफएसडीए जानकर भी अनजान बना हुआ है।