बरेली। बढ़ते तापमान और शुष्क मौसम के कारण गन्ना की फसल में ग्रीष्मकालीन चूसक कीटों के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए उप गन्ना आयुक्त राजेश मिश्र की ओर से एडवाइजरी जारी की गई है। इसमें गन्ना किसानों से अपील की गई है कि यह कीट प्रारंभिक अवस्था में दिखाई नहीं देते, लेकिन जैसे-जैसे इनकी संख्या बढ़ती है, यह पत्तियों और कोमल भागों से रस चूसकर पौधों को कमजोर कर देते हैं। इससे फसल की वृद्धि प्रभावित होती है और पैदावार में कमी आ जाती है।
चूसक कीट काले रंग का होता है, इसका प्रकोप अधिक तापमान एवं शुष्क मौसम में अप्रैल से जून में गन्ना पेड़ी में अधिक दिखाई देता है। प्रभावित पौधों की पत्तियां पीली हो जाती हैं और उन पर कत्थई रंग के धब्बे आ जाते हैं। थ्रिप्स कीट आकार में छोटे होते हैं। ये कीट पत्तियों की ऊपरी सतह से रस चूसते हैं, जिससे पत्तियां पीली एवं सिल्वर जैसी चमकदार दिखाई देती हैं व मुड़ने लगती हैं। मादा कीट गहरे भूरे रंग व नर हल्के रंग के होते हैं। थ्रिप्स पत्ती की ऊपरी सतह पर अंडे देते हैं। प्रभावित पत्तियों का अग्र भाग मुड़कर नुकीला हो जाता है।
सैनिक कीट पत्तियों को खाकर नुकसान पहुंचाते हैं। मादा कीट एक समूह में अंडे देती हैं। इन अंडो से चार-पांच दिन बाद सूड़ियां निकल कर समूह में पत्तियों को खाती हैं। पेड़ी फसल में इस कीट का प्रकोप अधिक होता है।
बचाव व उपाय
0 खेत में नियमित अंतराल पर सिंचाई कर नमी बनाए रखें।
0 खेत को खरपतवार एवं सूखी पत्तियों से मुक्त रखें।
0 संतुलित मात्रा में उर्वरकों का प्रयोग करें।
0 प्रकोप की स्थिति में सुबह या शाम के समय कीटनाशक का छिड़काव करें।
दवा का छिड़काव
0 सुबह या शाम को प्रोफेनोफाॅस 40, सायपरमेथ्रिन 4 ईसी 750 मिली या इमिडाक्लोप्रिड 17.8 में से किसी एक कीटनाशक का प्रति हेक्टेयर की दर से लगभग 625 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें।