24 मार्च को बरेली कॉलेज से दो कॉपियां गायब होना तो पुष्ट हो चुका है और 10 मार्च को एक और कॉपी गायब होने का मामला पकड़ा गया है लेकिन बताया जा रहा है कि सिर्फ यही तीन कॉपियां नहीं, कॉलेज से विश्वविद्यालय परीक्षा की और भी तमाम कॉपियां गायब हैं। अगर सही से जांच हो जाए तो उनका भी खुलासा हो सकता है लेकिन इनको दबाए रखने के लिए कॉलेज प्रशासन चुप्पी साधे बैठा है। 30 मार्च को एमएससी केमिस्ट्री का पेपर आउट होने और समाजवादी छात्र सभा के पूर्व प्रदेश सचिव विक्रम सिंह गंगवार के लिए बाहर से कॉपी लिखकर आने के मामले में जांच इधर-उधर से कराने के पीछे यही वजह समझ में आ रही है।
बता दें कि परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाएं विश्वविद्यालय की संपत्ति है और इनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी संबंधित कॉलेज की होती है लेकिन यह साफ हो चुका है कि बरेली कॉलेज इस जिम्मेदारी को निभा पाने में नाकामयाब साबित हो रहा है। परीक्षा के दौरान ही कॉपियां बाहर चली जाती हैं और चीफ प्रॉक्टर तथा प्रॉक्टोरियल बोर्ड के मेंबर भी पकड़ नहीं पाते। इन मामलों में कार्रवाई करने की बजाय कॉलेज प्रशासन इन्हें दबाने की कोशिश करे तो बात समझ में आती है कि कुछ लोगों को बचाने की कोशिश की जा रही है। 10 मार्च को गायब हुई कॉपी 12 मार्च की परीक्षा में लिखकर आई लेकिन इस मामले से प्राचार्य डॉ. सोमेश यादव लगातार खुद को अनिभिज्ञ बता रहे हैं। जबकि सच यह है कि 12 मार्च को भी बाहर से कॉपी लिखकर आई थी, यह बात वह मान चुके हैं और मामले की एलआईयू जांच के लिए एसपी को लिखे पत्र में इसका उन्होंने उल्लेख किया है।
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इसलिए मुश्किल नहीं था कॉपियां गायब होना
30 मार्च को विक्रम के लिए बाहर से लिखकर आई कॉपी पकड़े जाने से पहले स्टोर रूम से प्रत्येक परीक्षा कक्ष में 50-50 कॉपियां भिजवाई जाती थीं लेकिन परीक्षा कक्ष से वापस आने वाली कॉपियों की संख्या का कोई रिकार्ड स्टोर रूम में दर्ज नहीं किया जाता था। ऐसे में, यह पता नहीं लग पाता था कि कितनी कॉपियां वापस आईं। यह स्थिति तब थी, जब विश्वविद्यालय ने इस बार कॉपियों पर सीरियल नंबर दर्ज किया है। जाहिर है कि ऐसे में कॉपियां गायब होना बहुत मुश्किल नहीं था लेकिन मामला पकड़ में आने के बाद सतर्क हुए कॉलेज प्रशासन ने वापस आने वाली कॉपियों की संख्या भी रिकार्ड में चढ़वानी शुरू कर दीं।