नया शिक्षा सत्र शुरू होने के साथ ही अभिभावकों की जेब पर डाका पड़ना शुरू हो गया है। फीस में वृद्धि के बाद अब स्टेशनरी और किताबों के नाम पर बच्चों की पीठ और अभिभावकों की जेब पर बोझ डाला जा रहा है। भले ही सारी किताबें न पढ़ाई जाएं और सभी कापियां न प्रयोग में लाई जाएं लेकिन सेट के नाम पर जरूरत से ज्यादा स्टेशनरी अभिभावकों की थमाई जा रही है। स्कूलों के खिलाफ आवाज उठाकर कौन बच्चे के भविष्य के साथ खिलवाड़ करे, इस सोच के साथ किसी ने शिकायत तक भी जहमत नहीं उठाई। वहीं कई दुकानों पर बैग के साथ किताबें दी जा रही हैं।
कालीबाड़ी में बंगाल ट्रेडर्स के आनंद खंडेलवाल ने बताया कि पिछले दिनाें सेंट मारिया के प्री नर्सरी स्कूल की किताबें व स्टेशनरी का सामान 1900 रुपये में मिला। स्टेशनरी का कुछ सामान लौटाया तो वापस नहीं लिया गया। वहीं पुनीत कुमार ने बताया कि तीसरी और पांचवीं कक्षा की किताबें 3500 और 4100 रुपये में मिली है। दुकानदारों ने अधिक सामान भी नहीं वापस किया और कटौती भी नहीं की।
वहीं सरस्वती सदन के गुरु मेहरोत्रा का कहना है कि सहूलियत के लिए इस बार सेट से अलग भी किताबें व स्टेशनरी है। कोई सेट से स्टेशनरी वापस करता है तो मना नहीं करते। डीडी पुरम स्थित पशुपति बुक एजेंसी के मालिक व व्यापार प्रतिनिधि मंडल के पदाधिकारी आलोक अग्रवाल कहते हैं कि सरकारी स्कूलों की किताबों के लिए अभिभावक इधर-उधर दौड़ते हैं। लेकिन कान्वेंट स्कूलाें की किताबें एक जगह एक सेट में मिल जाती हैं। ऐसा नहीं है कि सेट से हम सामान वापस नहीं लेते। जो सामान दुकान पर ही वापस होने वाला है, उसे लौटा लेते हैं। आलोक बताते हैं कि इस बार स्टेशनरी की कीमत दस फीसदी बढ़ी है। वहीं स्टूडेंट इंपोरियम के सुधीर कुमार अग्रवाल कहते हैं कि ड्रेस में कोई दाम नहीं बढ़े।