बरेली। पहले चरण के लिए मतदान निपटते ही प्रदेश सरकार में लघु उद्योग राज्यमंत्री भगवत सरन गंगवार ने बागियों को निशाने पर ले लिया। नवाबगंज ब्लाक में जिला पंचायत के वार्ड नंबर चार से चुनाव लड़ रहे अपने बेटे अतुल गंगवार को हराने की कोशिश का आरोप उन्होंने भोजीपुरा के पूर्व विधायक वीरेंद्र सिंह गंगवार और नवाबगंज नगर पालिका की चेयरमैन शहला ताहिर के पति डॉ. ताहिर पर लगाया। बोले- हमारी पार्टी के ही इन दोनों नेताओं ने मेरे बेटे अतुल को हराने के लिए पूरी तरह से खुलकर विपक्षियों का साथ दिया। मंत्री ने कहा कि इन दोनों नेताओं ने क्षेत्र में जाकर वोटरों को बरगलाया। रात को घूम-घूमकर कहा कि अतुल को वोट मत देना। उसे हराना है। चाहे किसी को जिता देना। भगवत सरन ने कहा कि हमारी पार्टी के यह दोनों नेता और सारा विपक्ष वार्ड चार से भाजपा प्रत्याशी नीलम गंगवार के पक्ष में खड़े हो गया। बोले- फिर भी उन्हें अतुल की जीत की पूरी उम्मीद है, क्योंकि कार्यकर्ताओं ने बहुत मेहनत की है।
अहमदाबाद ने भी न दिया साथ
मंत्री भगवतसरन गंगवार को अपने पैतृक गांव अहमदाबाद से भी चुनौती मिली। यह उनके साथ ही बसपा के एमएलसी केसर सिंह गंगवार और भोजीपुरा के पूर्व विधायक वीरेंद्र सिंह गंगवार का भी पैतृक गांव है। मंत्री की माने तो वीरेंद्र सपा में होते हुए भी चुनाव में उनके खिलाफ रहे। जबकि वीरेंद्र रिश्ते में भगवत सरन के चचेरे भाई हैं। अहमदाबाद गांव जिला पंचायत के वार्ड नंबर आठ का हिस्सा है, जहां से मंत्री संजय सिंह को चुनाव लड़ा रहे हैं। वीरेंद्र के उनके खिलाफ होने से अहमदाबाद के वोटर सपा के पक्ष में एकजुट नहीं ही हुई, केसर सिंह ने भी अपने समर्थकों से सपा के खिलाफ मतदान कराया। रिश्ते में भगवत सरन केसर सिंह के चाचा हैं।
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बेटे के लिए जूझते रहे मंत्री भगवत सरन
बरेली। नवाबगंज ब्लाक के जिला पंचायत वार्ड नंबर चार से चुनाव मैदान में उतरे अपने बेटे अतुल गंगवार के लिए प्रदेश के लघु उद्योग राज्यमंत्री भगवत सरन गंगवार पूरे दिन जूझे। दोपहर तक वह अहमदाबाद गांव स्थित अपने पैतृक घर पर कई लोगों के साथ बैठकर बेटे और विभिन्न गांवों के समर्थकों से मोबाइल पर कई गांवों के पोलिंग स्टेशनों पर मतदान और मतदाताओं के रुझान की स्थिति जानते रहे। बेटे अतुल ने फोन पर कहा कि जीत रहे हैं। काफी वोट मिल रहे हैं तो समझाने लगेे- सब ऐसे ही कहते हैं। खुद अंदाजा लगाओ रुझान का। वोटिंग का आकलन खुद करने से ही सही स्थिति सामने आती है। इस बीच कई गांवों से समर्थकों के फोन आने लगे। रिसीव करते जाते और पूछने लगते, क्या स्थिति चल रही है, आपके गांव में? बताया जाता कि बहुत अच्छी तो पूछते- कितने फीसदी वोट पड़े हैं? समर्थक बताते- 60 फीसदी तो बोलते- वोट बढ़वाओ। शाम पांच बजे तक 80 फीसदी तक डलवा दो, तो स्थिति और मजबूत हो जाएगी। वोटरों को भेजो। किसी समर्थक का फोन आया। कहा कि ‘चौधरी साहब’ बात करना चाहते हैं। भगवत सरन बोले- कराओ। दुआ-सलाम के बाद बोले। अरे चौधरी साहब। बेटे का ध्यान रखिए। आपका ही भतीजा है। जिता दीजिए। चौधरी ने आश्वासन दिया तो निश्चिंत नजर आने लगे। नवाबगंज पहुंचे तब तक अतुल भी वहां आ गए। उनसे पूछने लगे। कहां-कहां गए। क्या स्थिति रही। उन्होंने कई गांव के नाम बताए और दावा किया कि जीत पक्की है तो बोले- फलां गांव में वोट तो मिला है लेकिन आधे में ही हो। खैर कोई बात नहीं। अहमदाबाद से नवाबगंज आने के दौरान दोपहर को रास्ते में कुछ गांवों पर पड़े बिस्तरों पर भी रुके और पार्टी कार्यकर्ताओं, समर्थकों के बीच बैठकर चुनाव की स्थिति जानते रहे। वह वार्ड आठ से जिला पंचायत चुनाव लड़ रहे संजय सिंह के लिए भी जुटे रहे।