नए कॉलेजों को संबद्धता और एनओसी जारी करने के लिए एमजेपी रुहेलखंड यूनिवर्सिटी में किस कदर नियमों की धज्जियां उड़ाई गईं इसके मामले सामने आते जा रहे हैं। यूनिवर्सिटी की परिनियमावली में अभी तक आयुर्वेद शामिल नहीं है फिर भी पांच नए कॉलेज को संबद्धता के लिए एनओसी जारी कर दी गई। नियमों के मुताबिक परिनियमावली में जो कोर्स शामिल नहीं है और जिसकी फैकल्टी कैंपस में गठित नहीं है, उस कोर्स को संचालित नहीं किया जा सकता।
आयुर्वेद में बीएएमएस की पढ़ाई कराने के लिए जो पांच कॉलेज खोलने को एनओसी जारी की गई है, उनमें एक बरेली, एक बिजनौर का एक मुरादाबाद का और दो अमरोहा के हैं। एनओसी के बाद ही संबद्धता प्रदान की जाती है। बता दें कि अब तक रुहेलखंड यूनिवर्सिटी से कोई आयुर्वेदिक कॉलेज संचालित नहीं था। प्रदेश के सारे आयुर्वेदिक कॉलेज कानपुर की छत्रपति शाहूजी महाराज यूनिवर्सिटी से ही संचालित हो रहे थे लेकिन पिछले साल शासन ने आदेश जारी करके इनके संचालन का जिम्मा क्षेत्रवार राज्य के विश्वविद्यालयों को दे दिया। नए कॉलेजों को एनओसी और संबद्धता का अधिकार भी क्षेत्रीय यूनिवर्सिटी को ही दिया गया लेकिन इसके बाद क्षेत्रीय यूनिवर्सिटी को एनओसी और संबद्धता के लिए आयुर्वेद को अपनी परिनियमावली में शामिल करना था, जो नहीं किया गया और एनओसी देने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। दरअसल परिनियमावली में आयुर्वेद कोर्स को शामिल करने की प्रक्रिया लंबी है, उसमें वक्त लगता इसलिए यूनिवर्सिटी प्रशासन ने नियमों को तोड़ने में कोई संकोच नहीं किया और जल्दी में पांच कालेजों को एनओसी जारी कर दी।
वर्जन
अभी कुछ दिन पहले ही आया हूं। यह मेरे संज्ञान में नहीं है। अगर ऐसा है तो देखेंगे कि यह एनओसी किन नियमों के तहत जारी की गईं, तभी कुछ बताया जा सकेगा।
-डॉ. साहिब लाल मौर्य, कुलसचिव