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सपा नेताओं को खूब बांटे डिग्री कॉलेज

Fri, 26 Jun 2015 02:14 AM IST
बरेली
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एमजेपी रुहेलखंड यूनिवर्सिटी ने नए कॉलेजों को संबद्धता बांटने का रिकार्ड बना दिया है। साल भर के अंदर 316 कॉलेजों को संबद्धता दी गई और दो सौ से ज्यादा कॉलेजों को एनओसी देकर संबद्धता की लाइन में लगा दिया गया है। अधिकांश कॉलेज सत्ताधारी सपा के नेताओं ने खुद और अपने चहेतों के खुलवाए हैं। जुगाड़-सिफारिशों की इस होड़ में यूनिवर्सिटी ने मानकों में भी खूब दरियादिली दिखाई।
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संबद्धता के खेल में बरेली और मुरादाबाद मंडल के सभी नौ जिलों के नेताओं ने भूमिका निभाई। बरेली में भोजीपुरा के विधायक शहजिल इस्लाम ने शेरगढ़ में आरबी गर्ल्स डिग्री कॉलेज खोला है। खुसरो डिग्री कॉलेज के नाम से शाहजहांपुर, पीलीभीत और बदायूं में भी कॉलेज खोलने को संबद्धता और एनओसी ली गई। फरीदपुर में बाबा फरीद कॉलेज के नाम से खुला कॉलेज भी नेता जी का ही है। फरीदपुर इलाके में खुले कबीर डिग्री कॉलेज का मालिक भी एक सपा से जुड़ा व्यक्ति है। एक कबीना मंत्री के नजदीकी लोगों की सिफारिशों पर मुरादाबाद मंडल में कई कॉलेजों को संबद्धता दी गई। इनमें स्वार का गरीब नमाज डिग्री कॉलेज और मौलाना अबुल कलाम आजाद महिला डिग्री कॉलेज का नाम चर्चा में है। बदायूं में खुले दो कॉलेज को एनओसी से लेकर संबद्धता दिलाने तक में सत्ताधरी नेताओं भूमिका निभाई। पीलीभीत के एक सपा नेता की सिफारिश पर हाफिज रहमत खां डिग्री कॉलेज ने संबद्धता पाई। यह तो महज कुछ उदाहरण भर हैं। पिछले साल में संबद्धता पाने वाले अधिकांश कॉलेजों से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष सत्ताधारी नेता ही जुड़े हैं।

वर्जन...
मैं अभी आया हूं। जो कॉलेज खुल चुके हैं, उनकी संबद्धता के बारे में कोई जानकारी नहीं है। इतना जरूर बता सकता हूं कि जिन कॉलेजों को एनओसी मिली है और उन्होंने अगर संबद्धता के लिए आवेदन किया है तो सबकी रिपोर्ट देखने के बाद 30 जून तक उनकी संबद्धता पर विचार किया जाएगा।
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-डॉ. साहिब लाल मौर्य, कुलसचिव
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इंसेट...
...तो इसलिए रजिस्ट्रार बनाए गए पीसीएस अफसर
रुहेलखंड यूनिवर्सिटी में कुलसचिव की कुर्सी पर डेढ़ साल में तीन पीसीएस अफसरों को बैठाने के पीछे माजरा अब सबकी समझ में आ गया है। सबसे पहले कुलसचिव का चार्ज तत्कालीन सीडीओ भगवान सिंह को दिया गया था, जिनके समय में ही संबद्धता की फाइलों के यूनिवर्सिटी में ढेर लग गए थे। नेताओं के दबाव और नियमों में कुछ पेंच फंसे तो आनाकानी करने के बजाय वह पीछे हट गए। इसके बाद कुछ महीनों के लिए बीडीए की सचिव गरिमा यादव को कुलसचिव का चार्ज मिला। उन्होंने भी संबद्धता की प्रक्रिया आगे बढ़ाई थी लेकिन धीमी गति  से काम करना नेताओं को रास नहीं आया तो फिर तीसरे पीसीएस अफसर एके सिंह की पूरी तरह से पोस्टिंग यूनिवर्सिटी में कर दी गई। उन्होंने आते ही संबद्धता का काम उपकुलसचिव महेश कुमार से हटाकर सीधे अपने नियंत्रण में ले लिया। इत्तफाक से इस बीच शासन ने संबद्धता के लिए एनओसी देने का अधिकार यूनिवर्सिटी को ही दे दिया। इसके बाद तो एनओसी और संबद्धताएं साथ-साथ चलती रहीं। नेताओं के कॉलेजों को एनओसी मिलते देर नहीं लगती, फटाफट संबद्धता भी दे दी जाती। यहां से जाते-जाते एके सिंह दो सौ कॉलेजों की एनओसी भी जारी कर गए।

इंसेट...
संबद्धता के लिपिकों के बारे-न्यारे
यूनिवर्सिटी के संबद्धता विभाग के लिपिकों की पिछले एक साल में इतनी मौज रही कि एक-दो लिपिक तो खुद को अफसर से कम नहीं समझते। उन्होंने इतनी संबद्धताएं अपने पटल से जारी कर दीं कि अब फाइलें गिनना तक उनको मुश्किल हो रही हैं। बृहस्पतिवार को कुलसचिव डॉ. साहिब राम मौर्य ने इन लिपिकों से उनके-उनके पटल से जारी कॉलेजों की संबद्धता की सूची मांगी तो यह टालमटोल करने लगे। इस पर कुलसचिव ने पांचों लिपिकों को नोटिस जारी करके रिकार्ड तलब किया है।


इंसेट...
संबद्धता पर कुलपति से दो टूक-

कोई पैसे मांगेगा तो सस्पेंड कर देंगे
0 यूनिवर्सिटी की ओर से कॉलेजों को बेहिसाब दी गईं संबद्धताओं में मानकों के उल्लंघन की शिकायतें हो रही हैं?
-मानकों को देखने के लिए ही पैनल का गठन किया जाता है। उस पैनल की जिम्मेदारी होती है कि वह मानकों से भलीभांति संतुष्ट होने के बाद ही अपनी रिपोर्ट दे। उनकी रिपोर्ट पर ही संबद्धता प्रदान की जाती है।
0 नेताओं के कॉलेजों को संबद्धता खूब देने की बात सामने आ रही है?
-यूनिवर्सिटी के नियमों के मुताबिक कॉलेजों के मानक देखे जाते हैं। जो आवेदन करते हैं, उनपर विचार किया जाता है। यह नहीं देखा जाता कि आवेदन करने वाला कौन है।
0 संबद्धता विभाग में मनमानी और यूनिवर्सिटी की छवि खराब करने जैसी शिकायतें भी मिलती रहती हैं?
-अगर ऐसी शिकायतें हमारे पास आती हैं तो उनको गंभीरता से लेकर तत्काल ऐसे कर्मचारियों को सस्पेंड किया जाएगा, जो पैसे मांगते हैं या लेते हैं। मैं ऐसे मामलों के शिकायतकर्ताओं से कहूंगा कि वह सीधे मुझसे लिखित शिकायतें करें।
0 कॉलेजों में मानकों के उल्लंघन पर क्या करेंगे?
-अगर कहीं मानकों के उल्लंघन के मामले सामने आते हैं तो उनकी जांच कराई जाएगी और अगर पाया जाता है कि कॉलेजों ने मानकों का पालन नहीं किया है तो संबद्धता वापस भी ली जा सकती है।
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