शिक्षिका डॉ. क्षमा द्विवेदी से अभद्रता के मामले में बरेली कॉलेज के शिक्षकों ने कॉलेज प्रशासन के रवैये के प्रति गहरा असंतोष व्यक्त करते हुए एक स्वर में कहा कि हृदेश यादव समेत सारे निरंकुश छात्र नेताओं पर शिकंजा कसा जाना चाहिए। ऐसे छात्र कॉलेज में न घुस पाएं और उन पर प्रतिबंध लगे। भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ऐसे छात्रों पर सख्त कार्रवाई हो।
बुधवार को कंप्यूटर सभागार में बुलाई गई शिक्षक संघ की आमसभा में सर्वसम्मति से शुक्रवार को विश्वविद्यालय की परीक्षाओं में सामूहिक रूप से असहयोग करने का निर्णय भी ले लिया गया। वहां मौजूद शिक्षकों ने कहा कि प्राचार्य ही परीक्षाएं करा लें, हम सहयोग नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि शिक्षकों के अपमान की घटना बार-बार होने से स्पष्ट है कि कॉलेज प्रशासन का रवैया लचर है, जिसकी वजह से छात्र नेताओं के हौसले बुलंद हैं । ऐसे माहौल में आगे भी अपमानित होने का डर है। आखिर कब किसके साथ क्या हो जाए, इसे रोकने का कोई इंतजाम होने चाहिए। यह भी तय हुआ कि अगर कुछ नहीं होता है तो वह अनिश्चितकाल के लिए भी परीक्षाओं के बहिष्कार का निर्णय लेने को बाध्य हो सकते हैं। शुक्रवार की परीक्षाओं के बहिष्कार के लिए वरिष्ठ अधीक्षकों ने परीक्षा संबंधित अलमारियों की चाबियां प्रभारी प्राचार्य डॉ. एसके शर्मा को सौंप दीं।
इस तरह निकला शिक्षकों का गुस्सा
. छात्र नेता की गिरफ्तारी के बाद कॉलेज में चल रहे बवाल के बीच प्राचार्य ने फोन करके हमसे कहा था कि डॉ. क्षमा और आप आ जाइए, माफी पर बात कर लीजिए। हम सब कॉलेज से जा चुके थे। वहां कैसे जा सकते थे। बाद में हमने उनके कहने पर डॉ. क्षमा के पति से बात कराई लेकिन उन्होंने माफ करने से इंकार कर दिया तो बात खत्म हो गई। इसके बाद प्राचार्य ने ही बताया कि हमने माफ कर दिया लेकिन अब वह कह रहे हैं कि माफ नहीं किया है। सही बात वही जानें । उनकी जिम्मेदारी तो शिक्षकों के सम्मान की है और यह धर्म उनको निभाना चाहिए। हमारा ऐसा कोई मंतव्य नहीं है कि छात्र नेता पर गुंडा एक्ट लगे लेकिन ऐसे तत्वों पर अंकुश जरूर लगना चाहिए ताकि इस तरह की घटनाएं बार-बार न हो सकें। सब लोग निर्णय लीजिए कि क्या करना चाहिए।- शिक्षक संघ के महामंत्री डा. वीपी सिंह
. प्राचार्य के बुलाने पर मुझे आने में कोई आपत्ति नहीं थी लेकिन आप सब ही बताइए कि गिरफ्तारी के बीच में जब हंगामा हो रहा था, सारे छात्र मौजूद थे तो क्या गारंटी थी कि मेरे साथ फिर कोई बदतमीजी नहीं होती। यह मेरी निजी लड़ाई नहीं है, संघ जिस स्तर तक लड़ेगा, मैं उसके साथ हूं। - डॉ. क्षमा
. हम कहीं कमजोर दिखाई पड़े हैं इसलिए बार-बार पुनरावृत्ति हो रही है। हमें तय करना चाहिए कि हम किस हद तक उदार हो सकते हैं। आज अगर गालियां सुनकर माफ कर दें तो फिर जब थप्पड़ पड़ेंगे तो क्या करना चाहिए, यह तय कर दीजिए, क्या हमारा अपना कोई सम्मान या गरिमा नहीं है। - डॉ. वंदना शर्मा
.घटना वाकई शर्म की बात है। हम सब चाहते हैं कि अराजकता न हो लेकिन हमें एक छात्र की वजह से हजारों छात्रों की परीक्षा में व्यवधान नहीं डालना चाहिए।- प्रभारी प्राचार्य डॉ. एसके शर्मा
. वह परीक्षा के दौरान, कैंपस में मोटर साइकिल से घूमता रहता है। उसकी इंट्री क्यों होती है। -डॉ. शशि मित्तल
मैं तो माफी मांगने को तैयार था -हृदेश
जिस लड़की का मैंने पक्ष रखा वह पहली बार फोटो लाना भूल गई थी। तमाम छात्र-छात्राएं हमसे मदद मांगते हैं तो उनके लिए हम कोशिश करते हैं। हां शिक्षिका से भोड़ी बहस हुई थी। जो कुछ भी गलत हुआ उसके लिए मैं माफी मांगने को भी तैयार था। यह गलत कहा गया कि मैंने माफी मांगने से मना किया। मैं यही चाहता हूं कि शिक्षक संघ की लड़ाई में मेरा भविष्य बर्बाद करने की साजिश न की जाए।
हृदेश और प्राचार्य के पक्ष में आए वीरपाल
बरेली कालेज की शिक्षिका के साथ की गई अभद्रता के मामले में समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष वीरपाल सिंह यादव बुधवार को हृदेश यादव और प्राचार्य डॉ. सोमेश यादव के समर्थन में खुलकर आ गए। उन्होंने कहा कि पूरे प्रकरण में शिक्षकों की पूरी मुहिम प्राचार्य डॉ. सोमेश यादव के खिलाफ है। छात्र नेता हृदेश को तो इस मामले में बेवजह घसीटा जा रहा है। उन्होंने कहा कि मैनेजमेंट कमेटी के कुछ लोग और कुछ शिक्षक प्राचार्य को हजम नहीं कर पा रहे ह। उन्होंने कहा कि छात्र नेता ह्रदेेश गोल्ड मेडलिस्ट है। उन्होंने शिक्षक वीपी सिंह पर आरोप लगाया कि प्रतिनियुक्ति पर होने के बाद भी उन्होंने अपने सात साल सीनियारिटी में जुड़वा दिए। इसकी जांच होनी चाहिए। वह ट्यूशन पढ़ा रहे हैं, उस पर भी रोक लगे। सपा जिलाध्यक्ष ने कहा कि कालेज में पढ़ाई का माहौल छात्र नेता नहीं बल्कि कुछ शिक्षकों की भूमिका के कारण खराब है।
मैनेजमेंट कमेटी की बैठक में उठाएंगे मामला
बरेली कॉलेज मैनेजमेंट कमेटी के वरिष्ठ सदस्य वीरबहादुर सक्सेना ने कहा कि शिक्षिका के साथ अभद्रता की घटना बेहद शर्मनाक है। उससे भी ज्यादा दुर्भाग्यपूर्ण यह है कि ऐसे छात्र-नेताओं को कुछ लोगों का सपोर्ट मिल रहा है। उन्होंने कहा कि मैनेजमेंट इस मामले में कड़ा निर्णय ले, इसके लिए वह खुद इस मसले को कमेटी की मीटिंग में रखेंगे।