बरेली। सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन के नाम पर मजाक किया जा रहा है। बेसिक स्कूलों में ड्रेस का इंतजार करते-करते बच्चों ने छमाही परीक्षा दे डाली, अब सर्दियां शुरू होने के बावजूद स्वेटर हाथ आने के आसार नहीं बन रहे हैं। सप्लायर ने अभी 3.37 लाख स्वेटरों के बजाय करीब 58 हजार स्वेटरों की ही सप्लाई की है लेकिन उसके साथ उनके साइज का ब्योरा न देकर अफसरों के सामने यह मुसीबत खड़ी कर दी है कि वे बच्चों को ये स्वेटर कैसे बांटे। बीएसए ने कानपुर के सप्लायर को इस मामले में नोटिस जारी किया है।
बेसिक शिक्षा विभाग के प्राइमरी और जूनियर हाईस्कूलों में पढ़ रहे 3.37 लाख बच्चों के लिए 200 रुपये प्रति स्वेटर के हिसाब से खरीद की जानी थी। शासन ने बच्चों को हर हालत में अक्तूबर में ही स्वेटर बांटने का आदेश दिया था। अधिकारियों ने इसके लिए जैम पोर्टल के जरिये नौ अक्तूबर को कानपुर की फर्म मैसर्स शुभम हैंडलूम को स्वेटरों की सप्लाई का कांट्रेक्ट दे दिया था। तय शर्तों के अनुसार सप्लायर को 25 अक्तूबर तक तय मानकों के अनुसार स्वेटरों की सप्लाई करनी थी लेकिन सप्लायर ने पूरे अक्तूबर भर स्वेटर नहीं भेजे। दो नवंबर को बीएसए तनुजा त्रिपाठी ने उसे रिमाइंडर नोटिस भेजा तो उसने 3.37 लाख स्वेटरों के बजाय सिर्फ 58764 स्वेटर भेज दिए। इन स्वेटरों के भी साइज का कोई ब्योरा नहीं भेजा गया है, जिसकी वजह से अफसरों की समझ में नहीं आ रहा है कि वे इन स्वेटरों को कैसे बांटे।
चालान न भेजने से कई दिन ट्रांसपोर्ट पर पड़ी रही स्वेटरों की खेप
कानपुर के सप्लायर ने ऑर्डर के मुताबिक पूरे स्वेटर नहीं भेजे, उनके साइज का ब्योरा नहीं दिया और बेसिक शिक्षा विभाग को वह चालान भी नहीं भेजा जिसके जरिये इस खेप को ट्रांसपोर्ट से छुड़ाया जाना था। इस वजह से कई दिन ये स्वेटर ट्रांसपोर्ट पर ही पड़े रहे। बीएसए ने फर्म को नोटिस दिया तब कहीं चालान आया लेकिन फिर साइज का ब्योरा न होने की वजह से मामला फंस गया।
आधे सीजन बाद भी आधे बच्चों को नहीं मिली ड्रेस
सरकारी सिस्टम का हाल इतना ज्यादा खराब है कि करीब आधा शैक्षिक सत्र गुजर जाने के बावजूद 50 फीसदी बच्चों को अब तक ड्रेस नहीं मिल पाई है। शासन ने प्रत्येक बच्चे को दो ड्रेस देने के लिए 600 रुपये का बजट दिया था। यह काम स्थानीय एनजीओ को दिया गया लेकिन अफसरों की लापरवाही से ज्यादातर बच्चों को ड्रेस ही नहीं मिल पा रही है। एनजीओ का कहना है कि ड्रेस के लिए जिस मानक के कपड़े की जरूरत है, वह मिल ही नहीं पा रहा है।
स्वेटरों की आपूर्ति के लिए सप्लायर को निर्देशित किया गया है कि वह सारे स्वेटर जल्द से जल्द उपलब्ध कराए। स्वेटर के साइज का ब्योरा मांगा गया है। स्कूलों में अभी छुट्टियां चल रही हैं। इसके बाद स्वेटर बंटने शुरू हो जाएंगे। -तनुजा त्रिपाठी, बीएसए