बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में करीब तीन लाख बच्चों के लिए घटिया क्वालिटी के जूतों और बस्तों की सप्लाई किए जाने पर शासन गंभीर हो गया है। बेसिक शिक्षा निदेशक डॉ. सर्वेंद्र विक्रम बहादुर सिंह ने बीएसए को आदेश भेजकर पिछले साल गारंटी पीरियड में ही फट गए जूते और बस्तों को वापस भेजने को कहा है। शासन के आए इस पत्र से उन विभागीय अफसरों में खलबली मच गई है जो पहले इस बात को सिरे से नकार रहे थे।
बेसिक शिक्षा विभाग के प्राइमरी और जूनियर हाईस्कूलों में पढ़ रहे 3.13 लाख बच्चों के लिए सर्व शिक्षा अभियान के तहत जूते-मोजे और बस्ते खरीदे गए थे। अफसरों ने खरीद के नाम पर सरकार की मोटी रकम ठिकाने तो लगा दी लेकिन जूते और बस्तों की क्वालिटी चेक नहीं की। इनकी क्वालिटी बेहद घटिया होने से बच्चों को मिले जूते और बस्ते गारंटी पीरियड में ही फट गए। इतना ही नहीं बच्चों के साइज के न होने से सैकड़ों जोड़ी जूते अभी तक स्कूलों में डंप पड़े बर्बाद हो रहे है। विभागीय अफसरों के इनकी सुध न लेने से सरकारी रकम का दुरुपयोग हो रहा है।
विभागीय अफसरों ने यह मामला जानकारी में आने के बाद भी कोई एक्शन नहीं लिया बल्कि जूते और बस्तों के अच्छी क्वालिटी के होने की बात कहते रहे। इधर, शासन ने इन मामलों को लेकर सक्रियता दिखाई है और बीएसए को आदेश देकर जूते और मोजे वापस करने का आदेश दिया है। प्रभारी बीएसए ऐश्वर्या लक्ष्मी ने बताया कि शिक्षा निदेशक का पत्र मिलने के बाद इस बारे में उन्होंने मातहतों को जरूरी निर्देश जारी कर दिए हैं।