रुहेलखंड विश्वविद्यालय में मुस्लिम कवियों की राष्ट्रीय चेतना पर संगोष्ठी
आंबेडकर विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. दीनानाथ जौहरी ने रखे विचार
बरेली। आंबेडकर विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. दीनानाथ जौहरी ने कहा कि साहित्य किसी जाति-धर्म की विचारधारा में नहीं बंधता। रुहेलखंड विश्वविद्यालय में मुस्लिम कवियों की राष्ट्रीय चेतना विषय पर व्याख्यान दे रहे पूर्व कुलपति ने कहा कि साहित्य एक धारा है, जो अपना रास्ता खुद बनाती है। यह कई विचारधाराओं, आस्थाओं और रीति-रिवाजों को अपने साथ समाहित करती है और संस्कृति का पोषण करते हुए नई राष्ट्रीय सोच और राष्ट्र निर्माण में सहायक होती है।
डॉ. जौहरी ने कहा कि वह खुद यह मानते हैं कि धर्म आपका निजी विषय है। आपका मौलिक चिंतन है। यह आपकी अपनी आस्था है। इसे लेकर न तो विवाद होना चाहिए और न ही कहीं प्रदर्शन। बताया कि उनकी पहली बेटी हुई तो उनके एक हिंदू दोस्त धर्मवीर, जो आईआईटी खड़गपुर के पहले रिसर्च स्कॉलर थे, ने बेटी का नाम नसीम सुझाया। नसीम का अर्थ सुबह चलने वाली ठंडी हवा से होता है। उन्होंने अपनी बेटी का नाम नसीम ही रखा। जब बेटा हुआ तो उनके एक अन्य दोस्त प्रो. हारुन अयूब ने उन्हें अमीन नाम सुझाया। इसका अर्थ धर्म पर चलने वाला होता है। उन्होंने यही नाम रख लिया।
बताया कि नाम या धर्म आपकी अपनी पसंद है। उनके दोनों बेटे और बेटी हिंदू हैं, पर नाम उनके उन्हें मुस्लिम सुझाते हैं। यही भारत की संस्कृति है। हम एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। हमें इस जुड़ाव को, एक दूसरे की मान्यताओं और भारत की संस्कृति को आत्मसात करना होगा। तब हमें यह नहीं बताना पड़ेगा कि मध्यकाल का कोई कवि मुस्लिम होतेे हुए भी राष्ट्रीय चेतना रखता था, क्योंकि तब हम सभी में राष्ट्रीय चेतना होगी और यह विषय ही गौण हो जाएगा।