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मैडम चुप रहीं जब कबाड़ी को बिकीं किताब, अब कोई क्या दे हिसाब

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नवाबगंज में बीईओ ने सत्र की शुरुआत में ही बेच दी थीं पूरे स्कूल की किताबें
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सीडीओ की सख्ती पर अब पुस्तक वितरण की मांगी रिपोर्ट तो चकराए शिक्षक
अमर उजाला ब्यूरो
बरेली। बेसिक स्कूलों में यूनिफार्म, स्वेटर, बैग और जूते-मोजे के वितरण में गड़बड़ी उजागर होने के बाद पुस्तक वितरण में हुए खेल की परतें भी खुलती जा रही हैं। सत्र के आठ महीने गुजरने के बाद बीएसए ने अब सभी खंड शिक्षा अधिकारियों से पुस्तक वितरण के साथ अवशेष पुस्तकों और उनकी गुणवत्ता की रिपोर्ट मांगी है। यह पत्र जारी होने के बाद गड़बड़ी करने वाले अफसर गर्दन बचाने के लिए शिक्षकों को मनाने में जुटे हैं। यह भी कहा जा रहा है कि नवाबगंज में जब खुलेआम किताबें कबाड़ी को बेच दी गई थीं, तभी सत्यापन कराया जाता तो यह नौबत नहीं आती।
पिछले दिनों पुस्तक वितरण के जिला समन्वयक राजीव शर्मा फर्म का बकाया 25 फीसदी भुगतान कराने पहुंचे तो सीडीओ सत्येंद्र कुमार के सवालों पर बगलें झांक ने लगे थे। सीडीओ ने वितरण के लिए आई पुस्तकों की गुणवत्ता, कागज का आकार, संख्या और कटी फटी पुस्तकों की रिपोर्ट दिखाने को कहा था। इस पर राजीव शर्मा ने रिपोर्ट न होने का जवाब दिया था। मामले को गंभीरता से लेते हुए सीडीओ ने नोटशीट में बीएसए से अवशेष पुस्तकों समेत पुस्तक वितरण संबंधित तमाम बिंदुओं पर रिपोर्ट मांगी थी। इस पर बीएसए ने सभी बीईओ को पत्र भेजकर अवशेष पुस्तकों की संख्या पूछी है। उन्होंने कहा है कि पुस्तकों की संख्या, वितरण और अवशेष की सूचना पांच दिसंबर को मांगी गई थी लेकिन अब तक एक भी ब्लॉक ने रिपोर्ट नहीं दी है। इस वजह से शासन को वास्तविक स्थिति की सूचना नहीं भेजी जा सकी है। उन्होंने निर्धारित प्रारूप पर तीन दिन में यह सूचना उपलब्ध कराने को कहा है। साथ ही, आदेश का अनुपालन न करने पर कार्रवाई की चेतावनी दी है। उन्होंने प्रत्येक स्कूल का सर्वे कराने के भी निर्देश दिए हैं।
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हालांकि बीएसए के इस आदेश पर विभाग में ही सवाल भी उठ रहे हैं। नवाबगंज की उस घटना का हवाला दिया जा रहा है जब एसडीएम ने सत्र की शुरुआत के ऐन बाद जुलाई में एक स्कूल की सारी किताबें एक कबाड़ी की दुकान पर पकड़ी थीं। जांच में पता चला था कि ये किताबें बीईओ रमेश चंद्रा ने बेची हैं। एसडीएम की ओर से पुलिस को तहरीर भी दिलाई गई थी लेकिन पुलिस ने रिपोर्ट ही नहीं दर्ज की। बीएसए ने भी रमेश चंद्रा को नवाबगंज से हटाकर मामला निपटा दिया और उन पर कोई कार्रवाई नहीं की। विभाग में अब कहा जा रहा है कि अगर तभी सख्ती की गई होती तो शायद सारे स्कूलों में किताबें पहुंच गई होतीं।
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