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आदेश देखकर शिक्षक चौंके, डीएम की सुनें या बीएसए की मानें

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डीएम ने घोषित किया तीन दिन का अवकाश, बीएसए ने कहा शिक्षक स्कूल खोलकर करें विभागीय कार्य
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बरेली। स्कूलों में अवकाश को डीएम और बीएसए की ओर से जारी आदेश ने शिक्षकों को असमंजस में डाल दिया है। इसे लेकर शिक्षक और बेसिक शिक्षा विभाग के अफसर आमने-सामने आ गए हैं। बीएसए की ओर से जारी आदेश में शिक्षकों को स्कूल खोलने को कहा गया है। जबकि शिक्षक संगठनों नेे डीएम के आदेशानुसार स्कूल बंद रखने का निर्णय लिया है। ऐसे में देर रात तक शिक्षक असमंजस में रहे, उन्होंने अफसरों को भी फोन लगाया लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला।
बुधवार को डीएम ने शहर में सर्द मौसम को देखते हुए नर्सरी से कक्षा आठ तक शासकीय, अर्द्धशासकीय, परिषदीय और वित्त विहीन, केंद्रीय, राज्य सरकार और मदरसा बोर्ड, सीबीएसई, आईसीएसई के सभी स्कूलों को 26 से 28 दिसंबर तक बंद रखने का निर्देश दिया है। इस अवधि में कक्षा नौ से 12वीं तक के विद्यार्थियों के लिए सुबह दस बजे से स्कूल खोलने का आदेश दिया है। आदेश का पालन न करने वाले स्कूल संचालक के खिलाफ सख्त कार्रवाई के भी निर्देश दिए हैं। वहीं, बीएसए ने देर शाम जारी आदेश में परिषदीय स्कूलों में कक्षा एक से 8वीं तक के बच्चों को अवकाश और शिक्षकों को विभागीय कार्य निपटाने के लिए स्कूल खोलने का आदेश दिया है। ऐसे में परिषदीय स्कूलों के शिक्षक असमंजस में हैं। वे डीएम का आदेश मानें या बीएसए की सुनें। शिक्षक संगठनों के पदाधिकारियों के मुताबिक बीएसए जबरन शिक्षकों पर तुगलकी फरमान लागू कर रही हैं। उन्होंने इसके विरोध की बात कही है।
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बेसिक शिक्षा निदेशक के आदेशानुसार सर्द मौसम में होने वाले आकस्मिक अवकाश में सिर्फ बच्चों को अवकाश देने को कहा गया है। शिक्षकों को स्कूल आकर लंबित कार्य निस्तारण के निर्देश दिए हैं। शिक्षा निदेशक के अनुसार शिक्षकों को स्कूल खोलना होगा। अगर इसमें लापरवाही बरती गई तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। - तनुजा त्रिपाठी, बीएसए
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