जूनियर और हाईस्कूल तक के स्कूलों में भी चल रही खेल की यह पाठशाला
बरेली। बच्चों को कानून समेत स्वास्थ्य का पाठ पढ़ाने के लिए स्वास्थ्य विभाग के किशोर केंद्र ने एक अनूठी पहल की है। केंद्र बच्चों के प्रिय खेल लूडो में फेरबदल कर उन्हें शारीरिक परिवर्तन, सीमित परिवार, नशा मुक्ति आदि का पाठ पढ़ा रहा है। जूनियर और हाईस्कूल तक के स्कूलों में भी खेल की यह पाठशाला शुरू हो गई है।
जिला अस्पताल स्थित किशोर केंद्र के डॉ. मोहम्मद नदीम खान ने बताया कि बच्चों को तस्वीरों और काउंसलिंग के जरिए सेहत समेत कानून का पाठ पढ़ाया जा रहा है। बच्चे इसे सुनते जरूर थे, लेकिन जल्द ही वह भूल भी जाते हैं। ऐसे में सर्वे के जरिए बच्चों को नवाचार विधि से पढ़ाने का रास्ता खोजने की प्रक्रिया शुरू हुई। सर्वे में पता चला कि बच्चे लूडो के खेल के फार्मेट में परिवर्तन कर बच्चों को आसानी से जागरूक किया जा सकता है। ऐसे में लूडो के खेल की सांप-सीढ़ी के जरिए अच्छे और बुरे कार्यों और उसके परिणाम को दर्शाया गया। यह खेल जूनियर, हाईस्कूल के बच्चों को टारगेट किया गया है। किशोर केंद्र की टीम स्कूलों में पहुंचकर बच्चों को लूडो के खेल के जरिए तमाम जानकारियां दी जा रही हैं।
सिर्फ थोड़ा फर्क और फायदा पूरा
लूडो के खेल में जहां-जहां सांप काटता है या सीढ़ियां चढ़ती उतरती हैं, उनके चढ़ने और उतरने वाले अंक पर ज्ञानवर्द्धक बातें लिखी गई हैं। जैसे चली गई चाल में 33 नंबर पर ‘लड़की को नहीं पढ़ाया’ पर पहुंचते हैं तो वहां पर बैठा सांप काटने के बाद सीधे 11 नंबर पर पहुंचा देता है। जहां ‘जीवन दुखी बनाया’ लिखा है। ठीक इसी तरह 2 नंबर के खाने पर लगी सीढ़ी ‘लड़का लड़की एक समान’ सीधे 24 नंबर के खाने पर पहुंचाती है, जहां ‘दोनों की अपनी पहचान’ लिखा हुआ है। इसी तरह अन्य नंबरों पर अलग बातें और संदेश लिखे गए हैं। डॉ. खान ने बताया कि बच्चे इस खेल को पूरे उत्साह से खेलते हैं और पूछने पर सटीक जवाब भी देते हैं।