बोर्ड ऑफ कंट्रोल को मैनेजमेंट कमेटी के सभी निर्णय की समीक्षा और सुधार का है अधिकार
बरेली। बरेली कॉलेज प्राचार्य विवाद में डीएम नितीश कुमार ने पूरे मामले की जांच के बाद अपनी रिपोर्ट बोर्ड ऑफ कंट्रोल के अध्यक्ष एवं कमिश्नर रणवीर प्रसाद को सौंप दी है। डीएम ने कहा है कि बरेली कॉलेज का मैनेजमेंट विवादित है, इसलिए मैनेजमेंट का हस्तक्षेप उचित नहीं। लिहाजा बोर्ड ऑफ कंट्रोल की बैठक बुलाकर इस मामले पर निर्णय लिया जाए।
बरेली कॉलेज में डॉ. अनुराग मोहन को प्राचार्य पद की जिम्मेदारी मिलने के बाद से ही खींचतान मची है। डॉ. पूर्णिमा अनिल ने खुद को डॉ. अनुराग मोहन से वरिष्ठ बताते हुए प्राचार्य पद पर अपना दावा प्रस्तुत किया है। पूर्व डीएम वीरेंद्र कुमार सिंह की जांच के बाद कमिश्नर एवं बरेली कॉलेज बोर्ड ऑफ कंट्रोल के अध्यक्ष रणवीर प्रसाद ने डीएम नितीश कुमार को स्थापन्न प्राचार्य तैनात कर स्थायी प्राचार्य की नियुक्ति के लिए बैठक बुलाने को कहा था। वहीं डॉ. पूर्णिमा अनिल और मैनेजमेंट कमेटी के सचिव देवमूर्ति ने भी इस संबंध में डीएम से अपना पक्ष रखा था। इस पर डीएम ने शनिवार को क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी डॉ. राजेश प्रकाश को बुलाकर पूरे मामले की जानकारी ली। दिन में दो दौर में करीब चार घंटे तक चली इस बैठक के बाद डीएम ने अपनी रिपोर्ट कमिश्नर रणवीर प्रसाद को भेज दी है, जिसमें कहा गया है कि मैनेजमेंट कमेटी के करीब 14 सदस्य विवादित हैं और मामला कोर्ट में विचाराधीन है। ऐसे में मैनेजमेंट कमेटी कोई निर्णय नहीं ले सकती। बोर्ड ऑफ कंट्रोल कॉलेज की मुख्य इकाई है, लिहाजा बोर्ड की बैठक बुलाकर यह मामला उसके समक्ष रखा जाए।
करीब तीन साल से नहीं हुई बोर्ड ऑफ कंट्रोल की बैठक
बताया जाता है कि बरेली कॉलेज में बोर्ड ऑफ कंट्रोल की बैठक वर्ष 2016 में अंतिम बार हुई थी। इसके बाद न तो मैनेजमेंट कमेटी के चुनाव हुए और न ही बोर्ड ऑफ कंट्रोल की बैठक ही बुलाई गई। बोर्ड ऑफ कंट्रोल कॉलेज की वह इकाई है, जो मैनेजमेंट कमेटी के हर निर्णय की समीक्षा करके उसमें संशोधन और बदलाव कर सकती है।
बरेली कॉलेज की मैनेजमेंट कमेटी विवादित है और मामला कोर्ट में भी है। लिहाजा कमिश्नर को पत्र लिखकर बोर्ड ऑफ कंट्रोल की बैठक बुलाने की संस्तुति की है।
- नितीश कुमार, डीएम
डॉ. पूर्णिमा ने जवाब भेजकर मांगी फार्म की मूल कॉपी
बरेली। एमए फाइनल अंग्रेजी में छात्रा का एडमिशन नियमविरुद्ध करने को लेकर प्राचार्य डॉ. अनुराग मोहन ने विभागाध्यक्ष डॉ. पूर्णिमा अनिल को पत्र लिखा था, जिसमें कहा गया था कि छात्रा के प्रथम वर्ष के बाद चार साल का अंतर है, लिहाजा उसका एडमिशन नियमविरुद्ध है।
प्राचार्य डॉ. अनुराग मोहन ने डॉ. पूर्णिमा अनिल को यह पत्र शुक्रवार को भेजा था। शनिवार को डॉ. पूर्णिमा अनिल ने इस पर जवाब भेज दिया है। उन्होंने प्राचार्य को पत्र लिखकर फार्म की मूल कॉपी मांगी है। उनका कहना है कि अंग्रेजी विभाग में एडमिशन के दौरान हर फार्म पर नोट लिखा जाता है। इस फार्म में भी जरूर लिखा गया है। इसमें दोषी वे लोग हैं, जिन्होंने छात्रा की फीस जमा की।