बरेली। करीब पौने तीन सौ करोड़ की लागत से बरेली-सितारगंज हाईवे को चौड़ा करने का काम लेने वाली वीआईएल नाम की कंपनी के भागने के बाद एनएचएआई ने अक्तूबर में उसे ब्लैक लिस्ट कर टर्मिनेट तो कर दिया लेकिन नई कंपनी को काम देने के लिए अब तक टेंडर नहीं कर पाई है। हाल ही में हुए हादसों में कई लोगों की जान ले चुका यह हाईवे अब कोहरे के मौसम में और खतरनाक हो जाने की आशंका जताई जा रही है।
यूपी को उत्तराखंड से जोड़ने वाले इस हाईवे पर बरेली से पीलीभीत होते हुए सितारगंज तक 74 किलोमीटर लंबी सड़क को चौड़ा करने के लिए पौने तीन सौ करोड़ रुपये में अक्तूबर 2013 में वीआईएल नाम की कंपनी को दिया गया था। कंपनी को यह काम मार्च 2016 में पूरा करना था लेकिन कंपनी उसे अधूरा छोड़कर भाग गई। अधूरे काम से सीतापुर फोरलेन की तरह खतरनाक हुए इस हाईवे पर अब अक्सर हादसे हो रहे हैं। करीब दो महीने पहले ही इस हाईवे पर रोडवेज बस और कार की टक्कर में एक परिवार के कई लोगों की मौत हो गई थी। इसे देखते हुए एनएचएआई ने अक्तूबर की शुरूआत में ही कंपनी को टर्मिनेट कर उससे काम छीन लिया था, लेकिन इसके बाद अब तक नई कंपनी को काम देेेने के लिए टेंडर की कार्रवाई शुरू नहीं हुई है।
अधिकारियों का कहना है कि अधूरे काम का सर्वे हो चुका है। इसके लिए करीब ढाई करोड़ रुपये और खर्च होंगे। टेंडर न होने से रिठौरा, नवाबगंज, पीलीभीत सहित कई जगहों पर टूटे और अधूरे हाईवे पर हादसे का खतरा बना हुआ है।
बीसलपुर रोड नकटिया पर एक पुल हुआ शुरू
बरेली-बीसलपुर रोड नकटिया पर टू-लेन के दो पुल बनने हैं। सेतु निगम ने एक पुल का निर्माण शुरू कर दिया है और इस पर ट्रैफिक भी शुरू हो गया है, जबकि टू-लेन के दूसरे पुल का निर्माण भी पूरा किया जा रहा है। इससे लोगों को यहां जाम से राहत मिल गई है।
बरेली-सितारगंज हाईवे के अधूरे काम का आंकलन किया जा रहा है। इसके लिए ढाई सौ करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च होने का अनुमान है। प्रोजेक्ट की अनुमति मिलने के बाद टेंडर कराए जाएंगे।
-एनपी सिंह, पीडी, एनएचएआई