बरेली। कमिश्नर रणवीर प्रसाद ने मैनेजमेंट कमेटी के अध्यक्ष एवं डीएम नितीश कुमार को बरेली कॉलेज में स्थानापन्न प्राचार्य यानी वैकल्पिक कार्यवाहक प्राचार्य नियुक्त करने के आदेश दिए हैं। मगर मैनेजमेंट कमेटी के सचिव देवमूर्ति ने इस पर नया दांव खेला है। उनका कहना है कि डीएम मैनेजमेंट कमेटी के पदेन अध्यक्ष नहीं, सदस्य होते हैं। मैनेजमेंट की बैठक में उन्हें अध्यक्ष चुना जाता है, लिहाजा वह प्राचार्य बदलने का निर्णय कैसे ले सकते हैं। वहीं, विशेषज्ञ सचिव के दावे को गलत ठहरा रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि डीएम ही बरेली कॉलेज के पदेन अध्यक्ष होते हैं।
बरेली कॉलेज में डॉ. अनुराग मोहन को प्राचार्य पद की जिम्मेदारी देने के फैसले को डॉ. पूर्णिमा अनिल ने चुनौती थी। कमिश्नर, डीएम समेत कई स्तर पर की गई शिकायत में उन्होंने वरिष्ठता के आधार पर खुद को प्राचार्य बनाने की मांग की है। इस पर तत्कालीन डीएम वीरेंद्र कुमार सिंह ने क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी डॉ. राजेश प्रकाश से जांच कराने के बाद अपनी रिपोर्ट बोर्ड ऑफ कंट्रोल के अध्यक्ष एवं कमिश्नर रणवीर प्रसाद को सौंपी थी। इस रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद शुक्रवार को कमिश्नर ने डीएम को निर्देशित किया कि मैनेजमेंट कमेटी के अध्यक्ष की हैसियत से वह कॉलेज में स्थानापन्न प्राचार्य की नियुक्ति कर कार्यवाहक प्राचार्य की नियुक्ति का प्रस्ताव बोर्ड ऑफ कंट्रोल को दें। मगर इस पर मैनेजमेंट कमेटी के सचिव देवमूर्ति ने नया दांव खेला है। उनका कहना है कि डीएम मैनेजमेंट कमेटी के पदेन सदस्य होते हैं। उन्हें अध्यक्ष मैनेजमेंट की बैठक में चुना जाता है। इसके बाद ही वह अध्यक्ष के तौर पर कोई निर्णय ले सकते हैं। चूंकि मैनेजमेंट कमेटी का विवाद अभी कोर्ट में विचाराधीन है, लिहाजा बैठक नहीं बुलाई जा सकती है।
डॉ. पीके अग्रवाल पर लग सकता है दांव
वहीं, देवमूर्ति का यह भी कहना है कि पूर्व प्राचार्य डॉ. अजय शर्मा की ओर से विश्वविद्यालय को भेजी गई वरिष्ठता सूची के मुताबिक डॉ. पीके अग्रवाल सबसे वरिष्ठ हैं। ऐसे में कहा जा रहा है कि अगर डॉ. अनुराग मोहन को हटाने की बारी आती है तो वह डॉ. पीके अग्रवाल का नाम प्रस्तावित कर सकते हैं। हालांकि डॉ. अग्रवाल ने प्राचार्य पद के लिए खुद कोई दावा नहीं किया है लेकिन उनका कहना है कि अगर उन्हें जिम्मेदारी दी जाएगी तो वे बखूबी निभाएंगे।
पूर्व प्राचार्य की बढ़ेंगी मुश्किलें
इस मामले में कमिश्नर ने पूर्व डीएम वीरेंद्र कुमार सिंह की रिपोर्ट के ही आधार पर निर्णय लिया है। उन्होंने पूर्व प्राचार्य डॉ. अजय शर्मा द्वारा डॉ. अनुराग मोहन को चार्ज देने की प्रक्रिया को भी गलत ठहराया है। ऐसे में पूर्व प्राचार्य डॉ. अजय शर्मा की मुश्किलें बढ़ना तय माना जा रहा है।
कमिश्नर दे सकते हैं निर्देश
वहीं, बरेली कॉलेज मैनेजमेंट विवाद की पूर्व में जांच कर चुके रुहेलखंड विश्वविद्यालय के डीएसडब्ल्यू प्रो. एके जैतली का कहना है कि कमिश्नर कॉलेज की सबसे उच्च बॉडी बोर्ड ऑफ कंट्रोल के पदेन अध्यक्ष होते हैं और डीएम मैनेजमेंट कमेटी के पदेन अध्यक्ष हैं। लेकिन अगर कमेटी के सचिव डीएम को पदेन अध्यक्ष नहीं मानते तो भी कोई फर्क नहीं पड़ता। कमिश्नर बोर्ड ऑफ कंट्रोल का वरिष्ठ उपाध्यक्ष होने के नाते उनसे बैठक बुलाने को कह सकते हैं।
डीएम जिले के मुखिया हैं, कोई भी निर्णय ले सकते हैं। बरेली कॉलेज मैनेजमेंट के वह पदेन सदस्य हैं, अध्यक्ष नहीं। पहली बैठक में उन्हें अध्यक्ष चुना जाता है, अभी वह अध्यक्ष के तौर पर कोई निर्णय नहीं ले सकते। - देवमूर्ति
हमारे पास जो पत्र आया था उसमें डीएम/प्रबंध समिति अध्यक्ष लिखा था। इस आधार पर डीएम प्रबंध समिति के अध्यक्ष हैं, उसी आधार पर उन्हें बैठक बुलाने के लिए अनुरोध किया गया है।
- रणवीर प्रसाद, कमिश्नर