बरेली। पीलीभीत में बीसलपुर तहसील के गांव इलावास देवल में प्राचीन देवस्थान के आसपास खुदाई के दौरान खंडित मूर्तियां और शिलालेख मिल रहे हैं। इनमें से कुछ मूर्तियों में खजुराहो के प्रसिद्ध मंदिर की झलक देखने को मिल रही है। पीलीभीत के एक युवा की पैरवी पर मामला शासन तक पहुंचा तो रुहेलखंड विश्वविद्यालय के प्राचीन इतिहास विभाग की टीम ने वहां जाकर सर्वे किया है। यहां मिले मूर्तिखंड को अब रुहेलखंड विश्वविद्यालय के म्यूजियम में रखा जाएगा।
इस गांव में स्थित मंदिर को लोधी समाज के लोग अपनी कुलदेवी का मंदिर मानते हैं। उन्होंने वहां खुदाई से प्राप्त मूर्ति को ही अपने मंदिर में स्थापित हुआ है। सर्वे करने वाली टीम के मुताबिक प्राचीन समय में वहां बड़े-बड़े टीले थे, जिन्हें लोगाें ने धीरे-धीरे खत्म करके खेत में शामिल कर लिया। मंदिर में एक प्राचीन शिलालेख भी लगा मिला है, जिसको लेकर तमाम भ्रांतियां हैं, लेकिन उस पर वहां का इतिहास लिखा हुआ है।
पीलीभीत के सामाजिक कार्यकर्ता शिवम कश्यप ने इसको लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय को पत्र लिखा था, जिसके बाद रुहेलखंड विश्वविद्यालय की टीम यहां सर्वे को पहुंची। इस टीम को वहां एक पत्थर पर उकेरी हुई स्त्री की एक ऐसी प्रतिमा मिली है जो खजुराहो के मंदिरों से मिलती जुलती है। पत्थर की एक खंडित मूर्ति का सिर और पिलर के नीचे का आधार मिला है, जो षटकोण के आकार का है। यह अवशेष 10-11वीं शताब्दी के बताए जाते हैं। रुहेलखंड विश्वविद्यालय की टीम इन्हें अपने साथ लेकर आई है और भविष्य में यहां विस्तृत जांच की प्लानिंग कर रही है। फिलहाल, इलावास से मिले इन मूर्तिखंडों को रुहेलखंड विश्वविद्यालय के म्यूजियम में रखने की तैयारी है।