बरेली। भविष्य को बेहतर बनाने का सपना हर बच्चे के मन में होता है। कोई डॉक्टर बनना चाहता है तो कोई इंजीनियर या किसी अन्य क्षेत्र में मुकाम हासिल करने का सपना मन में होता है। लेकिन कई बार आर्थिक तंगी की बेड़ियां रास्ते में बाधक बन जाती हैं और सपने बिखर जाते हैं। ऐसे में इन छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति मिल जाए तो उनका रास्ता बनता चला जाता है। अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से दी जाने वाली अतुल माहेश्वरी छात्रवृत्ति भी ऐसे ही छात्र-छात्राओं की उम्मीद पूरी कर रही है। रविवार को अतुल माहेश्वरी छात्रवृत्ति परीक्षा फरीदपुर स्थित फ्यूचर ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस में हुई।
अतुल माहेश्वरी छात्रवृत्ति परीक्षा पूर्वाह्न 11 बजे शुरू होकर दोपहर 12.30 बजे संपन्न हुई। परीक्षा में कुल 2467 छात्र-छात्राएं पंजीकृत थे। इसमें कक्षा नौ और दस में 874 पंजीकृत थे, जिनमें 563 उपस्थित रहे। कक्षा 11 और 12 में 1593 अभ्यर्थी पंजीकृत थे, जिनमें से 996 ने परीक्षा दी। कुल 63 प्रतिशत छात्र-छात्राओं ने परीक्षा दी। परीक्षा देकर निकले बच्चों ने अमर उजाला की पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि छात्रृवत्ति पाकर वे अपने सपने पूरे कर सकेंगे।
परीक्षा के बाद शंका समाधान
डेढ़ घंटे की परीक्षा के बाद जब छात्र-छात्राएं बाहर निकले तो कैंपस में ही साथियों से अपने उत्तरों का मिलान करने में जुट गए। फ्यूचर इंस्टीट्यूट के कैंपस में अभ्यर्थियों के कई ग्रुप ऐसा करते नजर आए।
मोबाइल में कैद की परीक्षा की यादें
परीक्षा केंद्र पर छात्र-छात्राओं को मोबाइल ले जाने की अनुमति नहीं थी। मगर जैसे ही परीक्षा छूटी तमाम छात्र-छात्राएं अपने परिजन से मोबाइल लेकर दोबारा कैंपस में पहुंचे और परीक्षा के यादगार लमहों को अपने मोबाइल में कैद किया।
अभिभावकों में भी दिखा उत्साह
अतुल माहेश्वरी छात्रवृत्ति परीक्षा को लेकर अभिभावक भी खासे गंभीर दिखे। तमाम अभिभावक स्वयं ही बच्चों को लेकर परीक्षा केंद्र पर पहुंचे। पेपर छूटा तो बच्चे की परीक्षा कैसी हुई, यह जानने के लिए उनमें भी उत्सुकता दिखी।
विशेष बच्चों ने भी दिखाया दम
बेहतर भविष्य का सपना मन में संजोए दो विशेष बच्चे भी अपने परिजन के साथ परीक्षा में शामिल होने के लिए पहुंचे थे। परीक्षा देने के बाद जब वे बाहर निकले तो सफलता को लेकर काफी आश्वस्त भी नजर आए।
परीक्षा में इनका रहा सहयोग
चेयरमैन मुकेश गुप्ता, महानिदेशक डॉ. मनीष शर्मा, डायरेक्टर इंजीनियरिंग डॉ. केपीएस चौहान, डॉ. शाहीन परवेज, डॉ. अभिषेक, डॉ. रितेश सक्सेना और थॉमस कुरियन समेत इंस्टीट्यूट के पूरे स्टाफ का सहयोग रहा।