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कपड़े की आपूर्ति न मिल पाने से अटकी बच्चों की ड्रेस की आपूर्ति

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बरेली। बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में शिक्षा सत्र के भले ही तीन माह से ज्यादा वक्त गुजर गया हो लेकिन अभी बड़ी संख्या में बच्चों को ड्रेस नहीं मिल पा रही है। अधिकारियों ने ड्रेस सिलाई का काम कई एनजीओ को दिया गया है। तमाम एनजीओ ने यह दिक्कत बताई है कि ड्र्रेस बनाने के लिए जो क्वालिटी तय की गई है, उन कंपनियों के कपड़ों की पूरी सप्लाई नहीं मिल पा रही है।
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शासन ने जुलाई में ही बेसिक स्कूलों के बच्चों को दो जोड़ी यूनिफार्म बांटने का आदेश जारी किया था। इसके लिए प्रत्येक बच्चे के लिए तीन सौ रुपये का बजट भी समय से हर जिले में भेज दिया गया था। जिले में करीब 2900 स्कूलों के 3.37 लाख बच्चों को स्कूल ड्रेस का वितरण होना है। शासन से बजट आते ही अधिकारियों ने प्रत्येक ब्लॉक में यूनिफार्र्म तैयार कराने का काम विभिन्न एनजीओ को सौंप दिया गया। इसके बाद ज्यादातर ब्लॉकों में 25 से 40 समूहों के माध्यम से यूनिफार्म तैयार कराना शुरू कर दिया गया लेकिन पेच तब फंसा, जब शासन की सख्ती के बाद कपड़े की जांच कराई गई तो एक-एक कर सभी सैंपल फेल हो गए। इसके बाद शासन ने बच्चों की ड्रेस बनवाने के लिए मानक तय करते हुए उसी क्वालिटी का कपड़ा इस्तेमाल करने के निर्देश एनजीओ को दिए गए हैं। एनजीओ संचालकों का कहना है कि जो मानक, उसके लिए कुछ ही कंपनियों के पास कपड़े हैं। कपड़े की आपूर्ति कम हो पाने से बच्चों को ड्रेस नहीं दी जा पा रही है।
एनजीओ ने कपड़ों की पर्याप्त आपूर्ति न मिल पाने से दिक्कत बताई है। इससे ड्रेस वितरण में देरी हो रही है। हालांकि 70 फीसदी बच्चों के ड्रेस वितरण की जानकारी मिली है। इसका सत्यापन होगा। -तनुजा त्रिपाठी, बीएसए
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