बरेली। रुहेलखंड विश्वविद्यालय में कंप्यूटर साइंस डिपार्टमेंट के पीछे कूड़े के ढेर में फेंकी गई बीटेक के छात्रों की उत्तर पुस्तिकाएं और गोपनीय रिकॉर्ड रविवार को अमर उजाला में खबर छपने के बाद उठवा तो लिया गया लेकिन यह रहस्य ही रह गया कि इस गैरजिम्मेदाराना हरकत के आखिरकार जिम्मेदार कौन था। डेढ़ सौ करोड़ को इधर से उधर करने के मामले में उलझे विश्वविद्यालय प्रशासन ने न इस घटना का संज्ञान लिया न जांच कराने की जरूरत समझी।
रुहेलखंड विश्वविद्यालय में एक के बाद आक गड़बड़ी सामने आ रही है। खासतौर पर विश्वविद्यालय की मूल्यांकन व्यवस्था काफी पहले से सवालों के घेरे में है। पिछले दिनों मूल्यांकन में हेराफेरी के लिए पैसों के लेनदेन तक का मामला सामने आया था। मूल्यांकन कितना पारदर्शी है, इसका उदाहरण शनिवार को उस वक्त भी सामने आया जब विश्वविद्यालय के स्टाफ ने ही बीटेक के छात्रों की तमाम उत्तर पुस्तिकाएं कंप्यूटर साइंस डिपार्टमेंट के पीछे कूड़े के ढेर में पड़ी पाईं। अमर उजाला ने इस संबंध में खबर छपने के बाद जिम्मेदारों में हड़कंप मच गया। रविवार को अवकाश होने के बावजूद कर्मचारियों को भेजकर कूड़े के ढेर से कापियां और गोपनीय रिकार्ड उठा लिए गए। हालांकि इस मामले में कोई जांच कराने की जरूरत महसूस की गई।