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बरेली कॉलेज- छात्रा ने किया ‘माफ’ मगर एडमिशन पर जवाब देना होगा

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बरेली। बरेली कॉलेज में समाजशास्त्र विभाग प्रकरण में जांच कमेटी के समक्ष पेश हुई छात्रा ने मामले को तूल न देते हुए कोई गिला-शिकवा न होने की बात कही। साथ ही यह भी बताया कि एक बार एमए करने की बात जानकारी में होने के बावजूद प्रवेश समिति ने उसे संस्थागत छात्रा के रूप में एडमिशन दिया है। छात्रा के इस बयान डॉ. उमाचरन गंगवार को बेशक राहत मिली है लेकिन प्रवेश समिति की मुश्किलें बढ़ गई हैं। अब शनिवार को कमेटी छात्रा के एडमिशन को लेकर जांच करेगी।
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पिछले दिनों बरेली कॉलेज के समाजशास्त्र विभाग में एमए प्रथम वर्ष की छात्रा ने एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. उमाचरन गंगवार पर उपहास उड़ाने और मोबाइल फोन तोड़ने का आरोप लगाया था। वहीं डॉ. उमाचरन ने छात्रा के आरोपों को गलत बताया था और कहा था कि उसने एक बार प्राइवेट छात्रा के तौर पर एमए करने के बाद नियमविरुद्ध तरीके से संस्थागत छात्रा के रूप में एडमिशन लिया है और वह अपना एडमिशन निरस्त कराने के लिए यह शिकायत कर रही है। प्राचार्य डॉ. अजय शर्मा ने मामले की जांच के लिए डॉ. पूर्णिमा अनिल, डॉ. मनमीत कौर और डॉ. एसी त्रिपाठी की कमेटी बना दी। कमेटी ने बृहस्पतिवार को छात्रा के बयान दर्ज किए, जहां उसने डॉ. उमाचरन से कोई गिला-शिकवा न होने की बात कहते हुए कोई कार्रवाई न करने की बात कही। मगर गलत तरीके से एडमिशन को लेकर छात्रा ने प्रवेश समिति को ही कठघरे में खड़ा किया। छात्रा का कहना था कि उसने प्रवेश समिति को पूर्व में भी एमए करने की बात कही थी, फिर भी उसका मेरिट में नाम आया और एडमिशन के लिए मेसेज भी भेजा है। ऐसे में नियमविरुद्ध एडमिशन के लिए वह दोषी नहीं है। अब जांच कमेटी शुक्रवार को इस मुद्दे पर जांच करेगी।
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