बरेली। केंद्र सरकार ने शैक्षिक गुणवत्ता सुधारने के लिए शिक्षा पद्धति में बदलाव की कवायद शुरू की है। इसका मसौदा तैयार करने के लिए विभिन्न विश्वविद्यालय से राय मांगी जा रही है ताकि हमारी शिक्षा मांग के अनुकूल हो और बेरोजगारी की समस्या दूर हो। रुहेलखंड विश्वविद्यालय ने अपने सुझाव में कहा है कि मांग के अनुरूप एंट्रोगोगी शिक्षा पद्धति लागू की जाए। इससे छात्र रटने के बजाय सीखने की दिशा में आगे बढ़ेंगे, जिससे उनकी शैक्षिक गुणवत्ता का स्तर सुधरेगा।
पूरे देश में इस समय बेरोजगारी के मुद्दे पर सवाल उठ रहे हैं। कहा जा रहा है कि हमारे यहां बीटेक और एमबीए जैसे व्यवसायिक कोर्स के बावजूद युवाओं को नौकरी नहीं मिल रही, जिसके लिए पुराने पाठ्यक्रम और पढ़ाई के तरीके को भी जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। इसी बीच सरकार ने नई शिक्षा पद्धति लागू करने की दिशा में काम शुरू किया है। इसके तहत जो पाठ्यक्रम होगा उसमें विविधता, अनुशासन, पर्यावरण, ई-लर्निंग, फिटनेस और स्पोर्ट्स को शामिल करते हुए तैयार किया जाना है।
रुहेलखंड विश्वविद्यालय के डीन स्टूडेंट वेलफेयर प्रो. एके जैतली ने बताया कि मौजूदा शिक्षा पद्धति में निर्धारित पाठ्यक्रम के तहत शिक्षक कक्षा में आते हैं, उपस्थिति लेते हैं, विद्यार्थियों को पढ़ाते हैं और फिर उसी आधार पर परीक्षा होती है। कहा जा सकता है कि छात्र वही सीखते हैं या रटते हैं, जो शिक्षक उन्हें पढ़ाते हैं। इस शिक्षा पद्धति को पिडोगोगी कहते हैं, जो बहुत पुरानी हो चुकी है। मगर अमेरिका जैसे देशों में यह व्यवस्था लागू नहीं है। वहां शिक्षक एक टॉपिक तय करके छात्र-छात्राओं को बता देते हैं, इसके बाद वे लाइब्रेरी में या अपनी सुविधा के अनुसार उस पर रिसर्च या पढ़ाई करते हैं।
कक्षा में शिक्षक उस टॉपिक पर विद्यार्थियों से बात करते हैं और उनकी तैयारी में अन्य चीजें जोड़कर उसे ज्यादा अच्छे से तैयार कराते हैं। इस पद्धति में टॉपिक को रटने के बजाय उस पर रिसर्च करने या सीखने का काम होता है, जिसे एंट्रोगोगी शिक्षा पद्धति कहा जाता है। चूंकि यहां विषय पर छात्र ने खुद तैयारी की होती है इसलिए वह कभी भी परीक्षा देने की स्थिति में भी होता है। प्रो. जैतली ने विश्वविद्यालय की ओर से सरकार को भेजी अपनी राय में एंट्रोगोगी शिक्षा पद्धति लागू करने को कहा है।
देश में लागू शिक्षा पद्धति बहुत पुरानी हो गई है, बाजार की मांग के अनुरूप इसमें बदलाव की जरूरत है। इसको लेकर सरकार ने विश्वविद्यालयों ने उनकी राय मांगी है। रुहेलखंड विश्वविद्यालय ने विदेशों की तर्ज पर एंट्रोगोगी शिक्षापद्धति लागू करने की राय दी है।
- रुप्रो. एके जैतली, डीन स्टूडेंट वेलफेयर, रुहेलखंड विश्वविद्यालय