फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

शैक्षिक गुणवत्ता परखने में 65 सह समन्वयक फेल, तीन पर गिरी गाज

विज्ञापन
विज्ञापन
बरेली। परिषदीय स्कूलों में शिक्षण गुणवत्ता परखने में नाकाम रहे 65 सह समन्वयक (एबीआरसी) में से महज तीन पर गाज गिरी है। तीन एबीआरसी को शिक्षण कार्य कराने के लिए उनके मूल पदों पर तैनाती दे दी गई है। इस कार्रवाई के साथ ही 62 अन्य असफल एबीआरसी को क्लीन चिट देने पर विभागीय कार्रवाई कार्यालय और शिक्षक संगठनों में चर्चा का विषय बनी हुई है। शिक्षक संगठनों ने असफल एबीआरसी पर कार्रवाई करने के बजाय उन्हें बचाने में खेल की संभावना जताई है।
विज्ञापन

परिषदीय स्कूलों में शैक्षिक अवलोकन व सहयोग करने के लिए प्रदेश भर में ब्लॉकवार विषयानुसार पांच-पांच शिक्षकों का चयन एबीआरसी पद पर हुआ था, जिन्हें कक्षाओं में कम से कम 30 मिनट तक ठहरकर पठन/पाठन की स्थिति देखनी थी, जिसकी रिपोर्ट इक्षा एप पोर्टल पर भी अपलोड करनी थी। पिछले सत्र में एक अक्टूबर 2018 से 31 मार्च 2019 तक इनके कार्य का अवलोकन हुआ तो जिले में 75 एबीआरसी में से सिर्फ 10 ही निर्धारित लक्ष्य को पार कर सके। इसके अलावा अन्य 65 एबीआरसी दो से नौ मिनट तक ही कक्षाओं में रहे। वहीं कक्षाओं के अवलोकन में खानापूर्ति की पुष्टि होने पर बेसिक शिक्षा निदेशक डॉ. सर्वेंद्र विक्रम सिंह ने सख्त कदम उठाया और सभी असफल एबीआरसी को उनके मूल पद यानी संबंधित प्राथमिक या जूनियर हाईस्कूल में शिक्षण कार्य कराने के निर्देश दिए थे, लेकिन 62 को बचाकर तीन पर कार्रवाई की खानापूर्ति हुई। मामले पर बीएसए को कॉल की गई लेकिन संपर्क नहीं हो सका।
कार्रवाई के बजाय लीपापोती शुरू
बताते हैं कि आदेश जारी होने के बाद कार्रवाई के बजाय बेसिक शिक्षा विभाग के अफसरों ने मामले में लीपापोती शुरू कर दी। एबीआरसी के बचाव पक्ष में खुद अफसरों ने कहीं नेट की समस्या तो कहीं फोन खराब होने तो कुछ ने एप पर डाटा सही से फीड न होने की दलील देकर एबीआरसी को बचा लिया। लिहाजा, निदेशक ने एक बार मौका देने के निर्देश दिए। फिर भी तीन एबीआरसी पर कार्रवाई किए जाने से खुद अधिकारी सवालों के घेरे में हैं।
विज्ञापन

दावा: एबीआरसी और शिक्षक संघ
यूटा जिलाध्यक्ष भानु प्रताप सिंह का कहना है कि एबीआरसी को रिवर्ट करने यानी मूल पदों पर भेजने में खेल हुआ है। इस मामले में डीएम से मुलाकात कर फिर से प्रशासनिक समीक्षा कराने की मांग की जाएगी। वहीं, एबीआरसी संघ के अध्यक्ष लाल बहादुर गंगवार का कहना है कि इक्षा एप पर प्राइमरी स्कूल के निरीक्षण की सूचना सेव नहीं होती। 80 से 90 निरीक्षण करने पर भी 20 से 25 संख्या प्रदर्शित होती है। एप की खामियों का जिम्मा एबीआरसी पर डाल देना गलत है।
इन पर गिरी है गाज
आलमपुर जाफराबाद के एबीआरसी संजय कुमार, बहेड़ी की राजबाला और हरेंद्र सिंह को उनके मूल पद क्रमश: क्यारा प्राइमरी स्कूल महेशपुर ठाकुरान, क्यारा जूनियर हाईस्कूल, बिरिया नारायणपुर, भदपुरा के जूनियर हाईस्कूल मधुनगला में तैनाती दी गई है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें