बरेली। मानकों को दरकिनार कर पीएचडी और एमफिल के रिसर्च स्कॉलर समय पर अपना रिसर्च पूरा न करके छात्रवृत्ति की राशि हड़प रहे हैं। इसको लेकर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने इन छात्र-छात्राओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई कराने की प्रक्रिया शुरू की है।
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग में पीएचडी का रिसर्च पूरा करने के लिए पांच साल और एमफिल के लिए दो साल का समय तय किया है। इस दौरान शोधार्थियों को छात्रवृत्ति भी दी जाती है। ऐसे में छात्रवृत्ति का लाभ पाने के लिए तमाम छात्र-छात्राएं अपना शोध कार्य समय पर पूरा नहीं छात्रवृत्ति डकार रहे हैं। यह मामला संज्ञान में आने पर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने इन छात्र-छात्राओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही उनसे इस राशि की रिकवरी भी की जाएगी। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा है कि इस कानूनी कार्रवाई के जिम्मेदार शोध छात्र, शोध पर्यवेक्षक और शोध समन्वयक होंगे।