बरेली। बेसिक शिक्षा विभाग में इन दिनों ‘प्रेरणा’ मोबाइल एप को लेकर काफी हल्ला मचा है। विरोध की वजह तमाम हैं। शिक्षकों के मुताबिक यह दमनकारी नीति है। वहीं, इन सबके बीच 5 सितंबर को मुख्यमंत्री इस एप को लागू करने जा रहे हैं। जिसके चलते जिले में शिक्षक और शिक्षामित्र संगठनों में खासा आक्रोश है। उन्होंने शासन, प्रशासन और शिक्षा विभाग के अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर एप लागू करने का आदेश स्थगित करने की मांग की है।
बेसिक शिक्षा का हाल किसी से छिपा नहीं है। इसके पीछे घोर अव्यवस्था और तमाम शिक्षकों की उदासीनता सामने आती रही है। मिड डे मील बनाने और बच्चों के खिलाने में पूरा दिन गुजर जाता है। अधिकारियों के मुताबिक प्रेरणा एप इस पर अंकुश लगाएगा। यह व्यवस्था फिलहाल लखनऊ के सरोजनीनगर ब्लॉक, कानपुर नगर और बाराबंकी के एक-एक ब्लॉक में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में चल रहा है। बुधवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पूरे प्रदेश में इसे लांच करेंगे। इसके बाद प्रेरणा एप में शिक्षकों की हाजिरी से लेकर स्कूल संबंधी पूरा ब्योरा हर दिन अपलोड करना होगा। इस बाबत पिछले दिनों सभी खंड शिक्षा अधिकारियों, डीसी और एबीआरसी को प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है। बता दें कि जिले में बेसिक के करीब चार हजार से अधिक शिक्षक-शिक्षिकाएं और करीब सवा तीन लाख बच्चे पंजीकृत हैं।
व्यवहारिक नहीं है प्रेरणा एप
यूनाइटेड टीचर्स एसोसिएशन ने प्रेरणा एप के विरोध में मुख्यमंत्री को संबोधित नौ सूत्रीय ज्ञापन दिया। जिलाध्यक्ष भानु प्रताप सिंह ने बताया कि शिक्षकों से शिक्षण कार्य के अतिरिक्त तमाम कार्य लिए जाते हैं। प्रेरणा एप से सेल्फी के साथ उपस्थिति व्यवहारिक नहीं है। दूर-दराज के विद्यालयों में नेटवर्क की समस्या की बात भी कही गई है। साथ ही, आधी-अधूरी तैयारियों के साथ एप लागू करने पर एतराज जताते हुए इसे स्थगित करने की मांग की है।
पहले स्थायी करो फिर लागू करो
प्रेरणा एप के विरोध में शिक्षामित्रों ने भी विरोध किया है। संघ के जिलाध्यक्ष डॉ. केपी सिंह ने शिक्षामित्र को मानदेय से हटाकर स्थायी किया जाए। इसके बाद नई नीतियां लागू की जाएं क्योंकि शिक्षा मित्र शिक्षकों के बराबर वेतनमान नहीं ले रहे हैं। प्रांतीय मंत्री कौशल कुमार सिंह का कहना है कि एप शिक्षामित्र या अनुदेशक पर लागू नहीं होता। सरकार की नीतियां शिक्षक के लिए हैं। उन्होंने प्रेरणा एप शिक्षक तक ही सीमित रखने की मांग की है।
ऐसे काम करेगा प्रेरणा एप
स्कूल में पहुंचते ही शिक्षकों को बच्चों के साथ सेल्फी लेकर एप पर अपलोड करनी होगी। तभी शिक्षक की हाजिरी लगेगी। फिर प्रार्थना सभा और एमडीएम खाते में बच्चों के साथ भी एक सेल्फी खींचकर एप पर डालनी होगी। आखिर में स्कूल की छुट्टी के वक्त की सेल्फी भी अपलोड करनी होगी।
ऑफलाइन भी काम करेगा एप
स्कूल की लोकेशन पर प्रेरणा एप ऑफलाइन भी काम करेगा। शिक्षक-शिक्षिकाएं निर्धारित सेल्फी को ऑफ लाइन एप में अपलोड कर देंगे तो वह अपलोड की गई फोटो या अन्य जानकारी मोबाइल पर नेट चालू होते ही अपने आप ऑनलाइन अपलोड हो जाएगी।
प्रेरणा एप की पूरी कार्यप्रणाली की जानकारी न होने से शिक्षक इसका विरोध कर रहे हैं। जिन जगहोें पर पायलट प्रोजेक्ट की तर्ज पर ये एप लागू किया गया है वहां पर बेहतर परिणाम दिख रहे हैं और वहां पर शिक्षकों ने कोई विरोध भी दर्ज नहीं कराया है। ये एप शिक्षा व्यवस्था की बदहाली को दूर करने में कारगर साबित होगा। - डॉ. प्रदीप कुमार, संयुक्त शिक्षा निदेशक