बरेली। जिला अस्पताल में डॉक्टरों की लापरवाही से हुई पांच दिन बच्ची उर्वशी की मौत के मामले में राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग ने डीएम वीरेंद्र कुमार सिंह से फिर जांच रिपोर्ट मांगी है। इससे पहले भी आयोग दो बार जांच आख्या मांग चुका है, लेकिन जिला प्रशासन की तरफ से अब तक कोई रिपोर्ट नहीं भेजी गई है।
पंद्रह जून को जिला अस्पताल में इलाज के अभाव में पांच दिन की उर्वशी की मौत हो गई थी। यह मामला सुर्खियों में आने के बाद आयोग ने इसका स्वत: संज्ञान लिया था और 25 जून व 26 जुलाई को लेटर जारी करते हुए जिला प्रशासन से इसकी रिपोर्ट मांगी थी। हालांकि अब तक आयोग को जांच रिपोर्ट उपलब्ध नहीं हुई। इसे लेकर आयोग से वरिष्ठ परामर्शदाता रमण कुमार गौड़ ने डीएम वीरेंद्र कुमार सिंह को एक बार फिर से चिट्ठी लिखते हुए पंद्रह दिन के अंदर मामले से संबंधित सूचनाएं और रिकार्ड उपलब्ध कराने निर्देश दिए हैं।
यह है प्रकरण :
विशारतगंज क्षेत्र के गोकिलपुर निवासी सुरेंद्रपाल पंद्रह जून को पांच दिन की बच्ची उर्वशी को लेकर जिला अस्पताल पहुंचे थे। बच्ची के प्रीमेच्योर होने के कारण उसकी दशा गंभीर थी। जिला अस्पताल में ड्यूटी पर मौजूद डॉ. एसएस चौहान ने बच्ची को देखाए लेकिन उसे बिना भर्ती व उपचार किए जिला महिला अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड के लिए रेफर कर दिया। सुरेंद्रपाल जब बच्ची को लेकर महिला अस्पताल पहुंचे तो वहां मौजूद डॉ. सौरभ ने रेडिएंट वार्मर एवं फोटो थेरेपी बेड उपलब्ध न होने का हवाला देकर वापस जिला अस्पताल की इमरजेंसी के लिए रेफर कर दिया। करीब तीन घंटे तक सुरेंद्रपाल बच्ची को गोद में लेकर भटकते रहे। आखिरकार बच्ची की मौत हो गई। इस मामले में सीएमएस डॉ. कमलेंद्र स्वरूप गुप्ता को शासन ने निलंबित कर दिया था।