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लर्न, अर्न और रिटर्न.. यही है भारतीय संस्कृति

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बरेली। परमार्थ निकेतन ऋषिकेष के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती ने युवाओं को जीवन का सार समझाते हुए कल्चर, नेचर और फ्यूचर को साथ लेकर आगे बढ़ने की सीख दी। उन्होंने कहा कि शिक्षा तभी सफल है जब उससे लर्न करें यानी सीखें, अर्न यानी कमाएं और रिटर्न करें यानी लौटाएं।
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रुहेलखंड विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में बतौर मुख्य अतिथि बोलते हुए स्वामी चिदानंद सरस्वती ने युवाओं को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जीवन से प्रेरणा लेने को कहा। उन्होंने कहा कि ये सभी हस्तियां संघर्ष के बाद आगे बढ़ी हैं। जब ये लोग इरादों के दम पर आगे बढ़ सकते हैं तो आप भी बढ़ सकते हैं। उन्होंने छात्र-छात्राओं से कहा कि अब आप दीक्षा लेकर जीवन में आगे बढ़ने जा रहे हैं तो अपनी भारतीय संस्कृति को साथ लेकर आगे बढ़ें। कल्चर, नेचर और फ्यूचर को लेकर आगे बढ़ेंगे तभी आपका भविष्य स्वर्णिम होगा। राज्यपाल आनंदी बेन पटेल को उन्होंने संस्कारशील, सृजनशील और संवेदनशील बताते हुए कहा कि उनसे सीखना चाहिए कि राजनीति से राष्ट्रनीति कैसे बने।
स्वामी चिदानंद ने प्रकृति पर बात करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने लाल किले से सबसे पहले शौचालय की बात की, फिर खुद झाड़ू उठा ली और सब सिंगल यूज प्लास्टिक पर बात हो रही है। ऐसे में युवाओं की भी जिम्मेदारी बनती है कि वे इको फ्रेंडली देश बनाने का संकल्प लें। हम पानी को बचाएंगे, पेड़ लगाएंगे और सिंगल यूज प्लास्टिक को खत्म करेंगे तो देश हराभरा होगा। बोले- हम इबादत साथ नहीं कर सकते क्योंकि धर्म अलग हैं लेकिन वतन के लिए 11-11 पौधे तो साथ लगा सकते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों का मेरा शहर-मेरी शान और मेरी गंदगी-मेरी जिम्मेदारी का संकल्प लेने का आह्वान किया।
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