बरेली। बीपीएड में छात्र-छात्राओं की कॉपी पर कोडिंग तोड़ने के इरादे से रोल नंबर और कॉलेज के नाम लिखने के पीछे एक नेता के कॉलेज के प्राचार्य को मास्टरमाइंड बताया जा रहा है। मगर छात्र-छात्राओं पर कार्रवाई के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन मास्टरमाइंड के बजाय छोटी मछलियों पर कार्रवाई करके मामले को रफा-दफा करने की तैयारी में है।
रुहेलखंड विश्वविद्यालय से संबद्ध चार महाविद्यालयों के छात्र-छात्राओं की बीपीएड की परीक्षा विश्वविद्यालय कैंपस में ही कराई गई थी। इसी दौरान केंद्र प्रभारी डॉ. अमित कुमार सिंह ने 25 छात्र-छात्राओं को पकड़ा था। इनमें से चार नकल कर रहे थे और 21 की कॉपी पर रोल नंबर के अलावा कोडवर्ड में कॉलेज के नाम लिखे थे। केंद्र प्रभारी ने सबकी कॉपी जब्त करके मामला परीक्षा विभाग को भेज दिया था। जांच के बाद इस मामले को यूएफएम (अनुचित साधन) का माना गया। इस पूरे खेल के पीछे एक बीपीएड कॉलेज के प्राचार्य का नाम सामने आया है और यह कॉलेज एक नेता का बताया जा रहा है। यूएफएम की कार्रवाई को लेकर पिछले दिनों छात्र-छात्राओं ने विश्वविद्यालय में हंगामा शुरू किया तो निजी कॉलेज के इस प्राचार्य को लेकर फिर से चर्चा शुरू हो गई है। उन्हें ही अन्य कॉलेजों और विश्वविद्यालय के बीच सांठगांठ का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है। लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन इस मामले में सिर्फ छोटी मछलियों पर ही कार्रवाई की तैयारी में है।