बरेली। कॉलेज पर कॉलेज खुलते रहे। सीटें बढ़ती रहीं, लेकिन एडमिशन का ग्राफ ऊपर नहीं चढ़ सका। सोमवार को रुहेलखंड विश्वविद्यालय में एडमिशन प्रक्रिया का अंतिम दिन था और अब भी 75 हजार से ज्यादा सीटें खाली रह गई हैं। इसके चलते निजी कॉलेज संचालक तनाव में हैं।
रुहेलखंड विश्वविद्यालय में आठ अप्रैल को एडमिशन प्रक्रिया शुरू हुई थी। शुरुआत से ही एडमिशन प्रक्रिया काफी धीमी रही और तीन बार इसकी तिथि बढ़ानी पड़ी। पहले ही स्नातक-परास्नातक प्रथम वर्ष में करीब दो लाख सीटें थी। इसी बीच गरीब सवर्ण आरक्षण भी लागू कर दिया गया। कुछ नए कॉलेज खुले तो कई को नए पाठ्यक्रम की मान्यता दे दी गई। ऐसे करीब 70 कॉलेज हैं। इसके चलते सीटों का आंकड़ा ढाई लाख तक पहुंच गया। लेकिन एडमिशन प्रक्रिया पिछले साल की तरह ही धीमी गति से चली। सोमवार 31 अगस्त को एडमिशन प्रक्रिया का अंतिम दिन था और विश्वविद्यालय से संबद्ध 550 से अधिक कॉलेजों में सिर्फ 2475 एडमिशन ही हुए। कुल मिलाकर एडमिशन का आंकड़ा 1,74,526 तक ही पहुंच सका और 75 हजार से अधिक सीटें खाली रह गई हैं। इसके चलते निजी कॉलेज संचालकों की चिंता बढ़ गई है और वे विश्वविद्यालय की ऑनलाइन पंजीकरण प्रक्रिया को कोस रहे हैं। उनका कहना है कि विश्वविद्यालय ने प्रति पंजीकरण सौ रुपये कमाई के चक्कर में मुश्किल बढ़ा दी। देहात क्षेत्र के छात्र-छात्राएं अभी भी तकनीकी जानकारी से दूर हैं। ऐसे में उन्हें मजबूरन प्राइवेट फार्म भरना पड़ेगा।