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स्कूलों में ड्रेस वितरण का घरों से होगा सत्यापन

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पंजीकृत बच्चों को ड्रेस वितरण का घरों से होगा सत्यापन
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- प्राथमिक-जूनियर स्कूलों में 3.25 लाख बच्चों को बंटेगी ड्रेस
बरेली। बच्चों के ड्रेस वितरण में इस बार प्रशासन तमाम खामियों को दूर करने की कवायद में लगा है। स्कूलों में पंजीकृत बच्चों को ड्रेस मिली या नहीं। जिलास्तरीय 80 अधिकारियों की टीमें इस बात का सत्यापन न केवल स्कूल बल्कि बच्चों के घर जाकर भी करेंगी। सवा तीन लाख बच्चों के लिए शासन से 19.20 करोड़ रुपये का बजट ड्रेस वितरण के लिए मिला है। 15 जुलाई से ड्रेस वितरण का काम प्रारंभ होगा।
प्राथमिक-जूनियर स्कूलों में बच्चों को बांटी जाने वाली ड्रेस वितरण में हर साल गोलमाल की खबरें चर्चा में रहती हैं। इस बार इन स्कूलों में ड्रेस वितरण के लिए न्याय पंचायत स्तर पर एनपीआरसी के अलावा जिला स्तर पर भी 80 अधिकारियों की टीम बनाई गई है। सवा दो लाख बच्चों को ड्रेस सप्लायर उपलब्ध कराएंगे। एक लाख बच्चों को ड्रेस वितरण का काम स्वयं सहायता समूहों को भी दिया गया है। बीस हजार से 1.0 लाख तक के कामों पर कोटेशन लेने का प्रावधान है। मगर, प्रत्येक बच्चों को दो ड्रेस की कीमत 600 रुपये शासन से निर्धारित होने से इसकी जरूरत नहीं महसूस की जा रही। हालांकि उन समूहों को ड्रेस वितरण का काम नहीं मिलेगा, जो डीआरडीए के पूर्व कर्मचारी ने अपने परिवार और रिश्तेदार महिलाओं के अलग-अलग नामों से बना रखे हैं। डीआरडीए कर्मी अपने परिवार और रिश्तेदारों के समूहों को ड्रेस वितरण का काम दिलाने के लिए अफसरों के दफ्तर के चक्कर लगा रहा है। इसने अपने अपने समूह को ड्रेस वितरण का काम दिलाने के लिए शेरगढ़ ब्लाक के छह स्कूलों को चिन्हित करके वहां के बीडीओ के नाम पत्र भी लिखा है। ब्लाक के अफसर फर्जी समूहों को ड्रेस वितरण का काम देने से साफ इनकार कर रहे हैं।
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कोट-
200 स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को ड्रेस वितरण का काम दिया गया है। वह एक लाख बच्चों को ड्रेस बांटेंगी। बाकी में समूह ड्रेस नहीं दे पा रहे इसलिए उन स्कूलों में फिलहाल सप्लायर ही ड्रेस उपलब्ध कराएंगे। मगर, 80 अधिकारियों की टीम बच्चों को ड्रेस मिलने का सत्यापन स्कूल और घरों में जाकर करेगी। गड़बड़ी मिलने पर सख्त कार्रवाई होगी। सत्येंद्र कुमार, सीडीओ
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