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रामगंगा के तट पर गूंजे ढोल-नगाड़े.. झूमे लोग

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बरेली। विजयादशमी पर महिषासुरमर्दिनी मां दुर्गा की पूजा को भी विश्राम दिया गया। सिंदूर उत्सव में खूब रंग छलके और इसके बाद सभी बाड़ियों और पंडालों से दुर्गा प्रतिमाएं एक-एक शोभायात्रा के रूप में रामगंगा के तट पर पहुंचीं जहां ‘अस्टी वचन भालो होवे..’ जयकारे के साथ उन्हें विसर्जित कर दिया गया।
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बंगाली दुर्गा पंडालों और बाड़ियों में मंगलवार को सुबह से ही कुछ अलग छटा थी। उत्साह से सराबोर लोगों ने दशमी पूजा के बाद दर्पण विसर्जन की रस्म पूरी की गई। कुछ समय विश्राम के बाद अलग-अलग समय पर सिंदूर उत्सव मनाया गया। महिलाओं ने मां दुर्गा का सिंदूर से वरण किया फिर सभी ने एक दूसरे को सिंदूर लगा कर अगले वर्ष फिर से मां के आने की कामना की। इस उत्साह और उल्लास भरे माहौल के बीच ट्रक और बसों के साथ जुलूस लेकर मां के भक्त विभिन्न रास्तों से होते हुए रामगंगा पहुंचे। तट पर ढाक, ढोल और नगाड़ों की धुन और ‘अस्टी वचन भालो होवे...’ जयकारों की गूंज के साथ मूर्तियों का विसर्जन किया। वहां से वापस पूजा मंडप आ कर सदस्यों ने शांति जल और आशीर्वाद प्राप्त किया।
रामगंगा के तट पर गूंजे ढोल-नगाड़े, झूमे लोग
रेलवे जंक्शन मनोरंजन सदन, चौपुला रेलवे कॉलोनी, बीआई बाजार, दुर्गा बाड़ी, एयरफोर्स कॉलोनी, इज्जतनगर रेलवे मनोरंजन सदन, कृष्णा नगर, इज्जतनगर रेलवे स्टेशन से भक्तों ने मां दुर्गा प्रतिमा के साथ शोभायात्रा निकाली। सभी शाम को रामगंगा घाट पर पहुंचे। वहां भक्तों ने ढाक और नगाड़ों की धुन पर नृत्य किया। जमकर आतिशबाजी भी की। बाद में माता का गुणगान कर रामगंगा में मूर्तियों का विसर्जन किया।
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