क्योलड़िया। भदपुरा ब्लॉक क्षेत्र की ग्राम पंचायत मेंथी नवदिया में छह साल पहले बना पशु चिकित्सालय देखरेख के अभाव में बदहाल हो चुका है। यहां चिकित्सक तक नहीं आते। भवन में झाड़ियां उग आई हैं। खाली पड़े भवन में ग्रामीणों ने उपले पाथना शुरू कर दिया है। क्षेत्र के लोग पशुओं का इलाज कराने के लिए झोलाछापों के भरोसे हैं।
अस्पताल का निर्माण करीब छह साल पहले तत्कालीन विधायक दिवंगत केसर सिंह ने कराया था। उस दौरान दावा किया गया था कि पशुपालकों को अब बीमार पशुओं का उपचार कराने के लिए दूर-दराज के अस्पतालों में नहीं जाना होगा। यह वादा अब तक पूरा नहीं हो सका। अस्पताल में कई तरह के उपकरण हैं। देखरेख के अभाव में यह सब बदहाल हो रहे हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि यहां अब तक चिकित्सक की तैनाती नहीं हुई है। इस वजह से अस्पताल का लाभ ही नहीं मिल पा रहा है। यहां रखे उपकरण धूल फांक रहे हैं।परिसर में जगह-जगह झाड़ियां उग आई हैं। भवन का मुख्य द्वार खुला रहता है। इसके चलते कुछ लोगों ने यहां उपले पाथना शुरू कर दिया है।
इलाज न मिलने से दम तोड़ रहे पशु
ग्राम प्रधान प्रियांशु गंगवार, कन्हैयालाल, झब्बूबक्श, नबी हुसैन, जमुना प्रसाद, सुखलाल, सतीशचंद्र, राम बहादुर आदि ग्रामीणों ने बताया कि बारिश के सीजन में पशु बीमारियों की चपेट में ज्यादा आते हैं। यहां चिकित्सक न होने की वजह से समय पर उपचार ही नहीं मिल पाता। ऐसे में कई बार पशुओं की मौत भी हो जाती है। अस्पताल शुरू न होने का फायदा झोलाछाप भी उठाते हैं। बीमार पशुओं का उपचार करने के नाम पर वह मोटी रकम पशुपालकों से वसूलते हैं।
वर्जन :
इस केंद्र पर अब तक डॉक्टर या फार्मासिस्ट की तैनाती नहीं हो सकी है, न ही पदस्थापना हो पाई है। ये काम शासन का है। नियुक्ति से पहले पदस्थापना होनी है, जो एक लंबी प्रक्रिया है। बरेली में डिप्टी सीवीओ के दो पद खाली हैं। डॉक्टर के भी 10 पद खाली हैं। स्वीकृत और रिक्त पदों की हर महीने निदेशालय को रिपोर्ट भेजते हैं। - डॉ. मनमोहन पांडेय, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी