बदायूं दातागंज निवासी राघवेंद्र पाल सिंह द्वारा जिलाधिकारी को सौंपे ज्ञापन के मुताबिक पत्नी रश्मि सिंह पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम की समस्या थी। डॉक्टरों के सुझाव पर संतान के लिए उन्होंने निजी क्लीनिक में आईवीएफ कराने पहुंचे। आरोप है कि इस दौरान चिकित्सकीय लापरवाही से पत्नी और गलत दवा के चलते ओवेरियन हाइपरस्टिमुलेशन सिंड्रोम की समस्या हो गई। गलत इलाज से रश्मि की दोनों किडनियां खराब हो गईं। वे एम्स पहुंचे तब वहां इसकी पुष्टि हुई। एम्स के विशेषज्ञ ने किडनी ट्रांसप्लांट का सुझाव दिया। आर्थिक तंगी के चलते ट्रांसप्लांट नहीं करा सके।
तब एम्स से डिस्चार्ज कर दिया गया। अब बरेली में ही डायलिसिस हो रहा है। आरोप है कि डॉक्टर की लापरवाही से पत्नी की जान संकट में पड़ी। इस पर डॉक्टर से जवाब मांगा तो वे चुप रहीं। कानूनी नोटिस दिया तो डॉक्टर ने गलती नहीं मानी लेकिन केस वापस लेने की धमकी दी।
इलाज पर खर्च हो गए रुपये, हालत जस की तस
राघवेंद्र के मुताबिक पत्नी की किडनी खराब होने के बाद से वे अब तक इलाज पर काफी रुपया खर्च कर चुके हैं पर हालत में सुधार नहीं हुआ। उन्होंने प्रकरण की जांच कराकर दोषी मिलने पर डॉक्टर के खिलाफ विधिक कार्रवाई की मांग की है। जिलाधिकारी को प्रमाण के तौर पर सभी जांच रिपोर्ट की प्रतिलिपि भी सौंपी है। जिलाधिकारी ने सीएमओ को प्रकरण की जांच के लिए टीम गठित करने के निर्देश दिए हैं।