हवा सिर्फ दिल्ली की खराब नहीं हुी है, ढाई सौ किलोमीटर दूर बरेली भी इसकी चपेट में है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के एयर मॉनीटरिंग प्रोग्राम के तहत शहर के अलग-अलग स्थानाें पर की गई जांच में पता चला है कि पिछले तीन दिन से बरेली की हवा भी सांस लेने लायक नहीं है। चौंकाने वाले आंकड़े ये हैं कि 100 से 200 के बीच के सामान्य मानक के बजाय शहर में एसपीएम की मात्रा 290 से 585 के बीच यानी तीन गुना तक पहुंच गई है। प्रदूषण के मामले में शहामतगंज और सिविल लाइंस की स्थिति सबसे ज्यादा खराब निकली है।
सोमवार को बरेली में सुबह से ही मौसम अचानक बदल गया था। जमीन से आसमान तक धुंध छाई हुई थी। इस वजह से 100 मीटर की दूरी पर तक देखना मुश्किल था। सोमवार को ही बरेली कॉलेज की ओर से चलाए जा रहे एयर मॉनीटरिंग प्रोग्राम के तहत हाई वॉल्यूम सैंपलर मशीन से आईवीआरआई और सिविल लाइंस में प्रदूषण की स्थिति की जांच की गई। ग्लास वूल फिल्टर पेपर पर सुबह छह से दोपहर दो बजे तक और रात दस से सुबह छह बजे तक वायु प्रदूषण की जांच में पाया गया कि आईवीआरआई में धुंध के अलावा वायु प्रदूषण की स्थिति बहुत चिंताजनक नहीं है, लेकिन सिविल लाइंस प्रदूषण उम्मीद से ज्यादा निकला। जांच के लिए लगाया गया सफेद रंग का फिल्टर काला दिखाई पड़ने लगा। यहां से यह जांच रिपोर्ट केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भेज दी गई है।
तीन दिन से चल रही है जांच----- फोटो
बरेली में तीन दिनों से पोर्टेबल मशीन के माध्यम से हवा की जांच की जा रही है। एयरफीडर मशीन में नेवीगेशन और सेंसर लगा हुआ है, जिससे कहीं भी खड़े होकर हवा का प्रदूषण जांच सकते हैं। इसका डाटा सेव होते ही यह सीधे केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को पहुंच जाता है। बरेली कॉलेज में एयर मॉनीटरिंग प्रोग्राम से जुड़े महेश बाबू ने बताया कि शहामतगंज, शाहदाना और मॉडल टाउन में पोर्टेबल मशीन से हवा की जांच की जा रही है। यहां पीएम 10 माइक्रॉन तक के कण का आंकड़ा 400 से अधिक है, जबकि पीएम 2.5 माइक्रॉन यानी खतरनाक कण का आंकड़ा 250 से अधिक है। मानक के अनुसार यह आंकड़ा 100 से 200 के बीच होना चाहिए।
पिछले तीन दिन के आंकड़े
तारीख शहामतगंज शाहदाना मॉडल टाउन
6 नवंबर 325 365 315
7 नवंबर 295 283 300
8 नवंबर 290 269 295
(नोट- यह आंकड़े पोर्टेबल मशीन से लिए गए हैं। यहां वायु में पाए गए सबसे खतरनाक कण पीएम 2.5 माइक्रॉन हैं, जबकि साधारण कण पीएम 10 माइक्रॉन के आंकड़े तीन इलाकों में 500 से अधिक हैं। मानक के अनुसार पीएम की मात्रा 100 से 200 के बीच होनी चाहिए।)
हवाआें का रुख तेज न होने और आसपास के इलाकों में धुएं की वजह से बरेली में भी धुंध दिखाई दे रही है। यह सांस के मरीजों, बुजुर्गों और बच्चों के लिए खतरनाक है। पोर्टेबल मशीन के डाटा को रोज इकट्ठा किया जा रहा है, जबकि सैंपलर मशीन से एक हफ्ते में परिणाम आ रहा है। बरेली में स्थिति चिंताजनक तो नहीं है लेकिन खराब जरूर है।
डॉ. डीके सक्सेना, पर्यावरणविद्