बरेली। जिले के कई दवा कारोबारियों ने पहले विभिन्न कंपनियों के नाम से नकली दवाओं में जमकर कमाई की। पोल-पट्टी खुली तो संबंधित कारोबारी अपने को निर्दोष साबित करने के लिए सोशल मीडिया पर सफाई देने में जुटे हैं।
दवा कारोबारियों के व्यापारिक संगठन के व्हाट्सएप ग्रुप पर मेसेज है कि काफी समय से बंसल (आगरा के दवा स्टॉकिस्ट बंसल मेडिकोज) जैसे व्यापारी बाजार में हैं, कोई सोच नहीं सकता था कि वह ऐसा भी करेंगे...। आगरा में बड़ी दवा मंडी होने के कारण बल्क में माल (दवाओं) की खरीदारी होती है इसलिए उन्हें कुछ प्रतिशत सस्ता माल मिलता है और यहां (बरेली) के व्यापारियों ने प्रतिस्पर्धा की मार और 4-5 प्रतिशत सस्ता होने से अनभिज्ञता में माल खरीदा है, इस बात से बेखबर रहे कि दवाइयां नकली हो सकती हैं। व्यापारियों ने मेसेज में कहा है कि लाइसेंसधारी अधिकृत विक्रेता से बिल पर और चेक अथवा नेफ्ट से माल लिया गया है...। संवाद
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दावा : गुनिना फार्मा ने कभी भी आगरा से नहीं खरीदी दवाई
केमिस्ट एंड ड्रग्स वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष दुर्गेश खटवानी ने दावा किया है कि गुनिना फार्मास्यूटिकल्स ने दवा कारोबार शुरू करने से लेकर आज तक आगरा के किसी भी स्टॉकिस्ट से दवाएं नहीं खरीदी हैं, न ही वहां की कोई इनवाॅइस उनके पास है। एलेग्रा भी उन्होंने सनोफी कंपनी से ली है। कायमोरल फोर्ट की टेबलेट लखनऊ के स्टॉकिस्ट से खरीदी हैं। इसका औषधि निरीक्षक ने 30 जुलाई को सैंपल भी ले रखा है। उन्होंने बताया कि जिस दिन कायमोरल फोर्ट का सैंपल लिया गया, उसी दिन ऑगमेंटिन टेबलेट उनके प्रतिष्ठान पर आई थीं, औषधि निरीक्षक ने उसका भी सैंपल ले लिया था। खटवानी ने बताया कि गुनिना के स्टॉकिस्ट महेंद्र 140 कंपनियों के स्टॉकिस्ट हैं, सभी के उनके पास बिल हैं।केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट वेलफेयर एसोसिएशन के मीडिया प्रभारी विजय मूलचंदानी का कहना है कि वह लोग आगरा में नकली दवा बेचने के मामले में पकड़े गए लोगों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग के लिए उच्चाधिकारियों को ज्ञापन देने की भी योजना बना रहे हैं।