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Bareilly News: गोबर से जाम हो रहे नाले, छुट्टा पशुओं व बंदरों से जान का जोखिम

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बरेली। नगर निगम के वार्ड 63 साहूकारा के लोग सड़कों पर अतिक्रमण, छुट्टा पशुओं, बंदरों की समस्या से परेशान हैं। नाले-नालियों में डेयरियों का गोबर बह रहा है। इससे नाले आए दिन जाम हो जाते हैं। नगर निगम की ओर से इन समस्याओं का निस्तारण नहीं कराए जाने से स्थानीय लोगों में आक्रोश है। अमर उजाला की ओर से रविवार को आयोजित वार्ड संवाद में लोगों ने खुलकर अपनी समस्याएं साझा कीं।
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गिरीश शरण अग्रवाल ने बताया कि बंदरों, कुत्तों की वजह से घर से निकलना मुश्किल हो गया है। इनकी वजह से सड़कों पर जाम भी लगता है। बारिश के दिनों में शीतला माता मंदिर के अंदर पानी भर जाता है। दिनेश बाबू राठौर ने बताया कि उनकी जनरल स्टोर की दुकान में पानी भरने से 20 हजार का नुकसान हो गया। कोई भरपाई करने वाला नहीं है।
साहित्यकार रणधीर प्रसाद गौड़ ने बताया कि शीतला माता मंदिर के पास की सड़कें नीची हैं। कुत्तों, बंदरों का खौफ इतना है कि औरतें सड़क पर निकलने से डरती हैं। दो-तीन आदमी डंडा लेकर खड़े होते हैं, तब बच्चे व महिलाएं उधर से गुजरती हैं। संजीव अग्रवाल ने बताया कि सड़कों पर गोवंशीय पशुओं का जमावड़ा रहता है। निगम की तरफ से कार्रवाई के समय डेयरी वालों को भनक लग जाती है। वे पशुओं को अंदर कर लेते हैं, जबकि आम दिनों में सड़कों पर अतिक्रमण किए रहते हैं।
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नागरिकों ने गिनाई समस्याएं
नाला रोड पर तीन बड़ी डेयरियां हैं। प्रत्येक में 500-700 भैंस हैं। इनका पूरा गोबर नालों व सीवर में बहाया जाता है। बारिश के दिनों में नाला जाम होने से पानी ओवरफ्लो हो जाता है। - धरनीधर गौतम
बंदरों से बचने के लिए दुकान व मकान पर जाल लगवा रखा है। लोगों ने छत पर सोना बंद कर दिया है। स्कूल टाइम पर लोग डंडा लेकर खड़े रहते हैं। पार्षद हों या अधिकारी, किसी को इससे मतलब नहीं है। - प्रभाकर मिश्रा
लोग सड़कों पर बोरिंग करा रहे हैं। पहले घर के आगे स्लिप बनाते हैं, इसके बाद गमले रखते हैं। कुछ दिनों बाद इसको जाल से घेरवाकर अतिक्रमण कर लेते हैं। अब ई-रिक्शा भी निकलना मुश्किल हो गया है। - विनीत अग्रवाल
नहीं हो पा रहा स्थायी समाधान
वार्ड में छुट्टा पशुओं और डेयरी के गोबर की समस्या से लोग 15 वर्षों से जूझ रहे हैं। कई बार निगम को सूचना दी जा चुकी है, लेकिन इसका स्थायी समाधान नहीं हो रहा है। बजरिया मोतीलाल में सड़क का निर्माण प्रस्तावित है। - प्रांजल गर्ग, पार्षद
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