तिरुवनंतपुरम जोन में तैनाती का किया था वादा
प्रशांत ने बताया कि आरोपियों ने अभ्यर्थियों का व्हाट्सएप ग्रुप बनाया। उसी के जरिये बात की। गूगल मीट के जरिये ऑनलाइन इंटरव्यू भी लिया। इसके बाद गूगल शीट साझा की गई, जिसमें अभ्यर्थियों को चयनित व रिजेक्ट दिखाया गया। चयनितों को तीन माह में ऑफर लेटर देकर तिरुवनंतपुरम जोन में तैनाती देने का वादा किया।
लेटर नहीं मिलने पर संपर्क किया तो टालमटोल करने लगे। बाद में आरोपियों ने बताया कि बिना ज्वॉइनिंग के ही एक मई 2026 से सैलरी शुरू हो गई है। संदेह होने पर एक अभ्यर्थी ने सोशल मीडिया के जरिये मानस अधीक्षक से संपर्क किया। पता लगा कि विवेक शर्मा ने तीन-चार माह ही हेल्पलाइन में काम किया था। उसके सेवा से हटाया जा चुका है। अब फर्जीवाड़ा कर रहा है।
सीओ आंवला हेमंत उपाध्याय ने बताया कि तहरीर के आधार पर दो आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर मामले की जांच की जा रही है। साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।