बरेली। नगर निगम में विकास कार्यों के नाम पर सरकारी धन के दुरुपयोग का आरोप लोगों ने लगाया है। नाली निर्माण के बाद उन्हें स्लैब से ढकने के स्पष्ट नियमों के बावजूद ठेकेदारों और अभियंताओं की मिलीभगत से करोड़ों रुपये पानी में बहाए जा रहे हैं। शहर के कई इलाकों में नालियों को निर्माण के बाद खुला छोड़ दिया गया है। इससे स्थानीय निवासियों और राहगीरों के लिए खतरा बढ़ गया है।
नगर निगम के रिकॉर्ड के मुताबिक, चालू वर्ष में जनवरी से लेकर 10 मई तक शहर के विभिन्न वार्डों में 2.15 करोड़ रुपये से 77 नालियों का निर्माण कराया जा चुका है, पर उन पर स्लैब नहीं डाले गए हैं। कार्यदायी संस्थाओं और ठेकेदारों ने नियमों को ताक पर रख दिया है। नियमानुसार, भुगतान से पहले संबंधित जूनियर इंजीनियर और सुपरवाइजर को कार्य का भौतिक सत्यापन करना होता है, लेकिन कई मामलों में इन्होंने मौके पर जाने की जहमत तक नहीं उठाई। अधिकारियों की इसी सुस्ती और अनदेखी के चलते ठेकेदार खुलेआम मानकों की धज्जियां उड़ा रहे हैं।
ठेकेदार ने चालाकी दिखाते हुए वहां तीन अलग-अलग घटिया क्वालिटी के स्लैब डाल दिए। भुगतान के वक्त सिर्फ अच्छी क्वालिटी वाले स्लैब के हिस्से की तस्वीरें खींचकर फाइल में लगा दी गईं और पूरा भुगतान डकार लिया गया।
केस 1
सुभाषनगर में नाथ कॉरिडोर परियोजना के तहत नाली व सड़क का निर्माण कराया जा रहा है। यहां के रहने वाले भूपेंद्र ने बताया कि निर्माण से पहले जेसीबी लगाकर सभी स्लैब आदि तोड़ दिए गए। उसके बाद ठेकेदार ने रोड तो बना दी, पर नालियों पर स्लैब डालने की जहमत नहीं उठाई। जहां लोगों ने ज्यादा दबाव बनाया, वहां ठेकेदार ने घटिया क्वालिटी के स्लैब डाल दिए। भुगतान के वक्त अच्छी क्वालिटी के स्लैब की तस्वीरें फाइल में लगा दी गईं और सरकारी धन डकार लिया गया। हालत यह है कि लोगों को अपने घर व दुकान के बाहर खुद ही स्लैब डलवाना पड़ रहा है।
केस 2
सीबीगंज के सर्वाेदयनगर निवासी आशीष ने बताया कि तीन माह पहले उनके घर के बाहर नाली का चौड़ीकरण हुआ है। ठेकेदार ने सभी स्लैब ताेड़ दिए। एक महीने में नाली तो बन गई, लेकिन घरों के आगे स्लैब नहीं डलवाए गए। जब लोगों ने ठेकेदार से कहा तो उसने नाली के ऊपर अतिक्रमण की बात कह दी। इसके बाद लोगों ने निजी खर्च से नाली के ऊपर जाल डलवाए।
वर्जन
नालियों के निर्माण के दौरान स्लैब डाले जाने चाहिए। कई जगह स्लैब डाले भी गए हैं। जहां शिकायत है, वहां टीम भेजकर दिखवाया जाएगा। - मनीष अवस्थी, मुख्य अभियंता