शहर के कई हिस्सों में बारिश के दो से तीन दिन तक रहता है जलभराव
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निगम ने 140 भवनाें के गिरने की आशंका जताई, नोटिस भेजकर खाली करने को कहा
बरेली। करोड़ों रुपये फूंककर भी शहर के ड्रेनेज सिस्टम को सुधारने में नाकाम नगर निगम ने अब लोगों को घर खाली करने का फरमान जारी किया है। शहर का ड्रेनेज सिस्टम पूरी तरह फेल है और मामूली बारिश में ही धड़ाम हो चुका है। ऐसा तब है जबकि निगम ने नए नालों के निर्माण, पुराने नालों की मरम्मत और नालों की सफाई के नाम पर जनता के टैक्स के करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाए हैं। बरसात में शहर में चौतरफा जलभराव देख निगम अफसरों के हाथपैर फूल गए हैं। जिन कालोनियों या मोहल्लों में बारिश के बाद कई दिन तक जलभराव रह रहा है वहां कमजोर स्ट्रक्चर वाले मकानों के गिरने का खतरा बढ़ गया है। ऐसे में निगम पहले ही पल्ला झाड़ने लगा है। निगम ने 140 भवनों के मालिकों को नोटिस जारी करके भवन खाली करने को कहा है।
मामूली बारिश ने ही शहर के ड्रेनेज सिस्टम और नगर निगम के दावों की पोल खोलकर रख दी है। जिन इलाकों में बारिश होने के दो से तीन दिन बाद तक जलभराव है वहां लोगों में आक्रोश है। डेढ़ से दो फुट तक पानी सड़कों पर खड़ा होने की वजह से यहां कमजोर मकानों के गिरने की आशंका में लोग सहमे हैं। इस खतरे से निगम अफसर भी अंजान नहीं हैं। निगम अधिकारियों ने सर्वे कराकर ऐसे 140 मकानों को चिन्हित किया है। जिनके गिरने की आशंका है। निगम की ओर से इन मकान मालिकों को नोटिस भेजकर तुरंत मकान को खाली करने को कहा गया है। शहर के साहूकारा, किला, सुभाषनगर, सैलानी कुतुबखाना व प्रेमनगर में सबसे अधिक ऐसे मकान चिन्हित किए गए हैं, जिनके गिरने की आशंका जताई गई है।। ऐसे मकानों की सर्वाधिक संख्या सुभाष नगर में है। यहां कई इमारत बेहद जर्जर और खंडहर जैसी हालत में हैं। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि निगम की ओर से हर साल मानसून से पहले ऐसे मकानों को चिन्हिति करके नोटिस जारी किया जाता है, जिनकी मियाद पूरी हो चुकी होती है। इन भवनों को खाली करने का नोटिस दिया जाता है। लेकिन नोटिस से इतर और कोई कार्रवाई नहीं होती। मुख्य अभियंता संजय सिंह चौहान ने बताया कि ऐसे भवनों की सूची तैयार की जाती है जो मियाद पूरी कर चुके हैं। बरसात में कोई हादसा न हो जाए इसलिए ऐसे मकान मालिकों से घर खाली करने को कहा जाता है।