बरेली। पत्नी की ओर से दहेज उत्पीड़न की धाराओं में वर्ष 2024 में प्रेमनगर थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया। पारिवारिक न्यायालय ने इस मुकदमे में महिला के द्वारा लगाए गए आरोपों को निराधार पाते हुए निरस्त करने का आदेश सुनाया है।
फरीदपुर क्षेत्र की रहने वाली युवती की शादी 2022 में प्रेमनगर के रहने वाले युवक से हुई, जो गुरुग्राम की एक प्राइवेट कंपनी में बतौर इंजीनियर कार्यरत है। महिला ने आरोप लगाया कि 24 दिसंबर 2023 को ससुरालीजनों ने दहेज के लिए पीटकर घर से निकाल दिया। महिला कोई रोजगार नहीं जानती, अपना खर्च चलाना मुश्किल है। महिला ने कहा कि पति का वेतन डेढ़ लाख रुपये है।
जबकि महिला बेरोजगार है। कोर्ट कचहरी, वकील आदि खर्च के लिए पति से प्रतिमाह 40 हजार रुपये खर्च की मांग की। वहीं महिला के पति ने कहा महिला एमए, बीएड व सीटीईटी उत्तीर्ण है, साथ ही फरीदपुर में अपने पिता के विद्यालय में पढ़ाती है, जहां से उसे 50 हजार रुपये प्रतिमाह मिल रहा है, वहीं ऑनलाइन व ऑफलाइन कोचिंग पढ़ाकर करीब तीस हजार रुपये कमाती है।
इन तथ्यों पर जांच हुई जिसमें पुलिस जांच में सामने आया कि महिला के पहले से विवाहेत्तर संबंध हैं, जिन्हें छिपाने के लिए ये आरोप लगाए। कोर्ट द्वारा महिला के खातों की जांच हुई साथ ही महिला ने अपनी योग्यता स्वीकार की।
महिला द्वारा लगाए गए आरोपों को गलत पाते हुए अपर न्यायाधीश ज्ञानेंद्र त्रिपाठी ने युवक के विरुद्ध चल रहे दहेज उत्पीड़न के मामले को निरस्त करने का आदेश सुनाया। संवाद